राज्य के अनुदानित स्कूल और कॉलेज इन दिनों पढ़ाई नहीं, जांच में फंसे हैं। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने इस वित्तीय वर्ष में अनुदानित संस्थानों की जांच व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है। पहले जहां केवल एक स्तर पर जांच होती थी, अब इसे चार स्तरों में बांट दिया गया है। इसके कारण हर संस्थान को बार-बार जांच का सामना करना पड़ रहा है। यह कहना है वित्त रहित संघर्ष मोर्चा का। सोमवार को बैठक के बाद मोर्चा के कुंदन कुमार सिंह, रघुनाथ सिंह, फजलुल कादरी अहमद, गणेश महतो, अरविंद सिंह, मनोज तिर्की, देवनाथ सिंह, चंदेश्वर पाठक, संजय कुमार, बिरसो उरांव, विनय उरांव, रघु विश्वकर्मा, रेशमा बेक, नरोत्तम सिंह, मनीष कुमार ने संयुक्त रूप से कहा कि स्कूल-कॉलेजों में जटिल निरीक्षण के कारण पढ़ाई भी प्रभावित है। पलामू के शाहिद भगत सिंह इंटर कॉलेज के एक कर्मचारी की हार्ट अटैक से मौत हो गई। इसे मोर्चा ने सिस्टम की संवेदनहीनता का नतीजा बताया है। जांच के नाम पर उत्पीड़न नहीं रुका तो 16 जनवरी के बाद राज्यव्यापी आंदोलन होगा। 12, 13 और 14 जनवरी को पर्व-त्योहार के कारण स्कूल-कॉलेज बंद हैं, फिर भी जांच जारी है, जबकि अनुदान अनुशंसा की अंतिम तिथि 15 जनवरी तय है। मोर्चा ने कहा कि जब 2006-07 से 2024-25 तक भूमि, भवन और आधारभूत संरचना की जांच हो चुकी है। इसके बाद भी बार-बार जांच क्यों? जब जियो टैग से सत्यापन हो चुका है तो फिर स्थलीय जांच का क्या औचित्य है? 16 जनवरी को मुख्यमंत्री और राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके बाद सभी प्राचार्य और प्रधानाचार्य की बैठक होगी। बजट सत्र के दौरान विधानसभा के सामने प्रदर्शन किया जाएगा। राजभवन के सामने एकदिवसीय महाधरना भी होगा। पहले चरण में जैक संस्थानों की जांच करता है। दूसरे में जियो टैग आधारित रिपोर्ट मांगी जाती है। तीसरे में जैक सभी दस्तावेजों का वीडियो बनाकर डीईओ को भेजता है। चौथे चरण में डीईओ संस्थानों की स्थलीय जांच करते हैं और वीडियो रिपोर्ट के साथ उसे जैक को भेजते हैं। इसके बाद जैक दोबारा सत्यापन कर अनुदान की अनुशंसा करता है। संस्थानों का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में समय, ऊर्जा और पैसा तीनों खर्च हो रहे हैं।


