ITI के 200 में से 33 अफसरों की 13 साल से परिवीक्षा खत्म ही नहीं हो रही

विभिन्न आईटीआई में कार्यरत प्रशिक्षण अधिकारियों की परिवीक्षा अवधि खत्म ही नहीं हो रही है। 33 ट्रेनिंग अफसरों का प्रोबेशन 2 साल में पूरा होना था, वह 13 साल बाद भी समाप्त नहीं हुआ। इस दौरान इन अफसरों को विभिन्न जिलों में ट्रांसफर किया जाता रहा। हद तो ये है कि साथ के 200 ट्रेनिंग अफसरों का परिवीक्षा अवधि बिना ट्रेनिंग के ही 2019 के राजपत्र की अधिसूचना के आधार पर 2020 में समाप्त कर दी गई है। अब 33 ट्रेनिंग अफसरों ने परिवीक्षा अवधि समाप्त करने के लिए फिर से कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग से न्याय की मांग की है। सूत्रों के अनुसार विभाग के एक अफसर के दबदबे के कारण मामला अटका हुआ है। बताया जा रहा है कि अफसर की राज्य के प्रभावशाली नेता से करीबी है। दरअसल, मामले में पहले तो विभाग ने ड्राइविंग लाइसेंस के वैलिड न होने का हवाला देते हुए इन्हें अपात्र बता दिया। जबकि वैकेंसी में ड्राइविंग लाइसेंस की मांग ही नहीं की गई थी। हालांकि, अभ्यर्थियों ने बाद में ड्राइविंग लाइसेंस भी हासिल कर लिया, पर विभाग में सुनवाई नहीं हुई। मामला कोर्ट पहुंचा तो 2017 में फैसला पिटीशन दायर करने वाले 16 ट्रेनिंग अफसरों के पक्ष में आया। कोर्ट के आदेश पर अमल नहीं: दिसंबर 2025 में अवमानना याचिका की सुनवाई में हाईकोर्ट ने परिवीक्षा अवधि समाप्त करने का आदेश दिया। इस पर कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग ने 10 दिन में कम्प्लाइंस का आश्वासन दिया लेकिन हुआ कुछ नहीं। अफसरों के खिलाफ गड़बड़ी के आरोप, जांच के बाद सभी बरी भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप में तत्कालीन संयुक्त संचालक एसएस भगत, तत्कालीन सहायक संचालक चिन्मय चौधरी और तत्कालीन प्रशिक्षण अधीक्षक, आईटीआई दुर्ग सरोज कुमार वर्मा के खिलाफ 18 मार्च 2016 को विभागीय जांच बैठा दी गई। जांच के बाद 23 सितंबर 2021 को चिन्मय चौधरी और एसएस भगत को, जबकि 17 जनवरी 2023 के आदेश में सरोज वर्मा को बरी कर दिया गया। अधिकतम पांच साल में समाप्त होना था प्रोबेशन 31 मई 2019 को प्रकाशित राजपत्र के अनुसार प्रशिक्षण अधिकारियों का प्रोबेशन सामान्यत: 2 वर्ष में पूरा होना था। इस दौरान उनको ट्रेनिंग या विभागीय परीक्षा पास करना था। राजपत्र में यह स्पष्ट लिखा है कि अधिकतम पांच साल की सेवा पूरी करने के बाद परिवीक्षा अवधि समाप्त की जा सकेगी। विभाग ने बिना ट्रेनिंग और विभागीय परीक्षा के ही 200 ट्रेनिंग अफसरों की परिवीक्षा अवधि समाप्त कर दी, लेकिन 33 ट्रेनिंग अफसरों पर कोई निर्णय नहीं लिया। पिछले 13 साल में इन अफसरों ने प्रशिक्षण के लिए विभाग में आवेदन दिया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। क्या है मामला: रोजगार एवं प्रशिक्षण संचालनालय ने 2010 में विभिन्न शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं में विभिन्न विषयों में प्रशिक्षण अधिकारी के 723 पदों के लिए आवेदन मंगाया। 24 दिन बाद विभाग ने संशोधित विज्ञापन में ड्राइविंग लाइसेंस की अतिरिक्त शर्त लागू कर दी। हालांकि, विभाग ने बिना ड्राइविंग लाइसेंस वाले आवेदकों के फार्म उस समय रिजेक्ट नहीं किए। हाईकोर्ट का आदेश हमें प्राप्त हुआ है। विभाग आदेश के क्रियान्वयन के संबंध में परीक्षण कर रहा है। आदेश के परीक्षण के बाद हम इस मामाने में कार्रवाई करेंगे।– एस भारतीदासन, सचिब कौशल विकास

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