जम्मू-कश्मीर के 5 सरकारी कर्मचारियों को आतंकियों से लिंक होने के मामले में नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। इन सभी का पाकिस्तान की खूफिया एजेंसी ISI ने प्लांट किया था। LG मनोज सिन्हा ने टेरर लिंक सामने आने के बाद मंगलवार को ये कार्रवाई की। अधिकारियों के अनुसार इनके लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिद्दीन जैसे आतंकी संगठनों से संबंध थे। निकाले गए कर्माचारियों में एक शिक्षक, एक लैब टेक्नीशियन, एक ड्राइवर, असिस्टेंट लाइनमैन और वन विभाग का एक फील्ड वर्कर शामिल है। पांचों को संविधान के अनुच्छेद 311 (2) (c) के तहत नौकरी से निकाला गया। सुरक्षा एजेंसी ने कहा- उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 2021 में आतंकी इकोसिस्टम को बेनकाब करने और उसकी कमर तोड़ने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया। फाइनेंसरों से लेकर जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं तक, सभी के खिलाफ उनकी निर्णायक और व्यापक कार्रवाई ने आतंकी इंफ्रास्ट्रक्चर को काफी हद तक खत्म कर दिया है शिक्षक को 2022 में गिरफ्तार किया गया था आधिकारियों के मुताबिक बर्खास्त किया गया शिक्षक पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के लिए काम कर रहा था। उसे अप्रैल 2022 में जम्मू और कश्मीर पुलिस ने पुलिस के खिलाफ एक योजना को अंजाम देने से पहले गिरफ्तार कर लिया था। वहीं लैब टेक्नीशियन और वन विभाग के फील्ड वर्कर का हिजबुल मुजाहिदीन (HM) से संबंध था। LeT से जुड़ा एक असिस्टेंट लाइनमैन और स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग में ड्राइवर के भी लिंक्स मिले हैं। 2021 से अबतक 85 कर्माचारी हटाए गए एक अधिकारी ने बताया कि 2021 से जम्मू और कश्मीर के LG ने 85 से अधिक सरकारी कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं जो आतंकवादी समूहों के लिए काम करते पाए गए थे। 8 जनवरी: केंद्रीय गृह मंत्री ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 8 जनवरी को जम्मू और कश्मीर पर एक हाई लेवल सुरक्षा समीक्षा बैठक की थी। बैठक में उन्होंने सभी सुरक्षा बलों को मिशन मोड में आतंकवादी इंफ्रास्ट्रक्चर और आतंकी फंडिंग को निशाना बनाते हुए आतंकवाद विरोधी अभियानों को जारी रखने का निर्देश दिया था। 20 दिसंबर: जम्मू-कश्मीर के रतले हाइड्रो प्रोजेक्ट के 29 मजदूरों के टेरर लिंक मिले जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में चिनाब नदी पर बन रहे रतले हाइड्रो प्रोजेक्ट में काम करने वाले 29 मजदूरों के टेरर लिंक मिलने का ममला सामने आया था। ये कर्मचारी देश विरोधी और क्रिमिनल एक्टिविटी में शामिल थे। पुलिस ने कंपनी से इन कर्मचारियों को काम पर रखने के फैसले पर फिर से विचार करने को कहा है। ऐसे लोग प्रोजेक्ट की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। कंपनी को ऐसे मजदूरों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। 850 मेगावॉट क्षमता वाला यह प्रोजेक्ट नेशनल हाइड्रो पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHPCL) और जम्मू-कश्मीर सरकार का जॉइंट वेंचर है। जिसकी अनुमानित लागत 3700 करोड़ रुपये है। कंस्ट्रक्शन का काम मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MEIL) को दिया गया है। पूरी खबर पढ़ें…


