विवेकानंद ग्लोबल विश्वविद्यालय के 9वें दीक्षांत समारोह में शिक्षा के प्रति समर्पण और जज्बे की एक प्रेरक मिसाल सामने आई, जब स्मिता अपनी 6 वर्षीय बेटी के साथ मंच पर डिग्री लेने पहुंचीं। इस भावुक क्षण ने उपस्थित विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों को गहराई से प्रभावित किया। स्मिता ने कहा- पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती और न ही जिम्मेदारियां शिक्षा की राह में बाधा बननी चाहिए। उन्होंने यह संदेश विशेष रूप से महिलाओं के लिए दिया, जो विभिन्न कारणों से अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़ देती हैं। दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा- शिक्षा केवल डिग्री पाने का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और राष्ट्रनिर्माण की सबसे मजबूत आधारशिला है। उन्होंने युवाओं से नवाचार, आत्मनिर्भरता और ईमानदारी के साथ देश के विकास में योगदान देने का आह्वान किया। स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कठिनाइयों को अवसर में बदलने की प्रेरणा दी। समारोह में 1983 डिग्रियों का वितरण यह दीक्षांत समारोह इसलिए भी विशेष रहा क्योंकि इसी अवसर पर सेंटर फॉर डिस्टेंस एजुकेशन और ऑनलाइन विवेकानंद ग्लोबल विश्वविद्यालय का पहला संयुक्त दीक्षांत समारोह आयोजित हुआ। कार्यक्रम में विभिन्न संकायों के 1,942 स्नातक, स्नातकोत्तर व डिप्लोमा विद्यार्थियों और 41 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। विद्यार्थियों के चेहरों पर वर्षों की मेहनत की संतुष्टि और उपलब्धि की खुशी स्पष्ट झलक रही थी। शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए विश्वविद्यालय द्वारा कुल 109 विद्यार्थियों को पदक प्रदान किए गए। इनमें 47 स्वर्ण, 32 रजत और 30 कांस्य पदक शामिल रहे। कुलसचिव डॉ. प्रवीण चौधरी ने विद्यार्थियों को शपथ दिलाई। विद्यार्थियों ने ईमानदारी, मानवीय मूल्यों के सम्मान और समाज-राष्ट्र की सेवा में अपने ज्ञान के उपयोग का संकल्प लिया। कुलसचिव ने कहा कि डिग्री के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ती है और विद्यार्थियों से अपेक्षा है कि वे अपने आचरण से विश्वविद्यालय की गरिमा बनाए रखें।


