बालाघाट में विस्थापितों का प्रशासन को अल्टीमेटम:कहा- घर नहीं छोड़ेंगे, 200 से अधिक परिवारों को नहीं मिला मुआवजा

बालाघाट जिले के लालबर्रा जनपद पंचायत के वनग्राम चिखलाबड्डी, नवेगांव और सोनेवानी के विस्थापित परिवारों को अब तक विस्थापन की पूरी राशि नहीं मिली है। इससे नाराज परिवारों ने प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है कि जब तक उन्हें पूरी राशि नहीं मिलेगी, वे अपने घर नहीं छोड़ेंगे। दरअसल, सोनेवानी वन परिक्षेत्र को संरक्षित करने के लिए इन वनग्रामों में रह रहे परिवारों को विस्थापित करने का निर्णय लिया गया था। इन परिवारों को दिसंबर 2025 तक प्रति परिवार विस्थापन की राशि देने का आश्वासन दिया गया था। हालांकि, यह समय-सीमा बीत जाने के बाद भी राशि का भुगतान नहीं हुआ है। विस्थापितों का कहना है कि पहली किश्त के रूप में मिली राशि से कई परिवारों ने अपने मकानों का निर्माण शुरू कर दिया था, लेकिन राशि खत्म होने के कारण काम अधूरा पड़ा है। वे अब अपने घरों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। कुछ परिवारों ने जमीन खरीदने के लिए बयाना दिया था, लेकिन रजिस्ट्री की समय-सीमा समाप्त होने के कारण उनका बयाना फंस गया है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है। पूर्व जनपद सदस्य झनकारसिंह उइके ने बताया कि 200 से अधिक परिवार ऐसे हैं जिन्हें विस्थापन की शेष राशि नहीं मिल पाई है। उन्होंने यह भी बताया कि विस्थापित परिवार सालई और टेकाड़ी पंचायत की आवास भूमि पर बसे हैं, जबकि कुछ ने जमीन खरीदने के लिए बयाना दिया है। उइके के अनुसार, पहली किश्त के रूप में 5 लाख रुपये की राशि दी गई थी, लेकिन शेष राशि के अभाव में परिवार न तो अपने मकान पूरे कर पा रहे हैं और न ही नई जमीन खरीद पा रहे हैं। विस्थापित परिवारों ने प्रशासन से जल्द से जल्द शेष राशि जारी करने की मांग की है।

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