मप्र में आगामी 9 अप्रैल को तीन राज्यसभा सीटें खाली होने जा रही हैं। इनमें दिग्विजय सिंह, केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन और सुमेर सिंह सोलंकी का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इस बार दो सीटों पर नए चेहरों को मौका मिल सकता है। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने तीसरी बार उच्च सदन में नहीं जाने की इच्छा जताई है। अगर कांग्रेस उन्हें राज्यसभा नहीं भेजती है, तो प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव या कमलेश्वर पटेल में से किसी एक को मौका मिल सकता है। तीनों ओबीसी वर्ग से हैं, जो कांग्रेस की पिछड़ा वर्ग रणनीति में फिट बैठते हैं। वहीं, भाजपा से केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन को दूसरा कार्यकाल मिलने की संभावना अधिक है। केरल से आने वाले कुरियन के केंद्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा होने के कारण पार्टी उन्हें दोबारा मौका दे सकती है। केरल में इसी साल विधानसभा चुनाव भी हैं, इसलिए भी उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। वहीं सुमेर सिंह सोलंकी का यह पहला कार्यकाल है। भाजपा में राज्यसभा का टिकट किसे मिलेगा, यह केंद्र तय करेगा। इस संबंध में फरवरी में पार्टी की एक बैठक भी होने वाली है। पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के चलते भाजपा यहां राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए किसी बाहरी को मौका दे सकती है। यदि ऐसा नहीं होता है, तो मप्र से लालसिंह आर्य, विनोद गोटिया, नरोत्तम मिश्रा और सुरेश पचौरी जैसे नामों पर विचार हो सकता है। सज्जन और अहिरवार ने उठाई कांग्रेस में राज्यसभा में दलित नेता को भेजने की मांग:
दिग्विजय सिंह के बयान के बाद कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार और कमलनाथ समर्थक सज्जन सिंह वर्मा ने राज्यसभा में दलित नेता को भेजने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि अनुसूचित जाति वर्ग की आबादी 17% है, लेकिन उच्च सदन में लंबे समय से किसी दलित नेता को प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।


