गिरल लिग्नाइट माइंस के पास आकली गांव के किसान पिछले 25 साल से आरएसएमएमएल की ओर से किए जा रहे खनन का मलबा डालने से परेशान है। यहां किसानों के खेतों में माइंस से निकलने वाले मलबे के डंपिंग यार्ड बना दिया है। किसानों ने आरोप लगाए है कि अधिकारियों की मिलीभगत से कंपनी ने नियमों को ताक पर रखकर किसानों की उपजाऊ जमीन पर मलबे के पहाड़ खड़े कर दिए हैं। पिछले ढाई दशकों से प्रभावित किसान मुआवजे और इंसाफ के लिए दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन न तो कंपनी के अफसर सुन रहे हैं और न ही सरकार। ग्रामीणों ने बताया कि खातेदारी जमीन पर मलबा डालने की वजह से न तो खेती कर पा रहे हैं और न ही यह जमीन किसी काम की रही है। गिरल लिग्नाइट माइंस बाड़मेर के अधिकारियों द्वारा कोयला खदान में खुदाई के लिए 1994 से खनन किया जा रहा है। जमीन की सही पैमाइश नहीं होने और ग्रामीणों की अज्ञानता का फायदा उठाकर कंपनी ने निजी खातेदारी की जमीनों पर बेंटोनाइट डालना शुरू कर दिया। यह है पूरा मामला पीड़ित किसानों के अनुसार खसरा संख्या 1430 और 1421 पाबूपुरा कोटड़ा हल्का पटवारी लगता है। इस खसरे में खातेदारी कृषि भूमि पर आरएसएमएमएल ने गैर कानूनी तरीके से बिना किसी भूमि अवाप्ति के कोयला खदान से निकलने वाला मलबा डालकर उसे अवैध विस्तार रूप से डंपिंग ग्राउंड बना दिया है। किसानों को पिछले 25 सालों से आर्थिक नुकसान हो रहा है। पटवारी द्वारा 17 जुलाई 2025 को उपखंड कार्यालय शिव में पेश की गई रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से लिखा है कि यहां के काश्तकारों की कृषि योग्य जमीन वहां डाले गए बेंटोनाइट और मलबे के अत्यधिक डंपिंग से प्रभावित है। अधिकारियों पर तथ्य छिपाने का लगाया आरोप किसानों ने माइंस मैनेजर ए. के. जयसवाल, सर्वे प्रबंधक राकेश सिंधिया और हेड ऑफिस सीओ बाड़मेर एमएस सोलंकी ने उच्च अधिकारियों को गलत रिपोर्ट पेश करने का आरोप लगाया है। कंपनी के अधिकारियों ने रिपोर्ट में मलबे से हुए नुकसान को अतिवृष्टि के कारण डंप खिसकना और आपसी समझौता बताकर इसे प्राकृतिक आपदा बताया है, लेकिन पटवारी ने रिपोर्ट में बताया कि अतिवृष्टि कभी हुई ही नहीं है। “गांव के किसानों की जमीन पर आरएसएमएमएल द्वारा बेंटोनाइट का मलबा डाल दिया है। इस संबंध में न तो कंपनी द्वारा मुआवजा दिया जा रहा है और न ही जमीन का किराया। इसकी शिकायत संभागीय आयुक्त तक की है।” – जगदीश कुमार माली, किसान “कोटड़ा पटवार क्षेत्र में आरएसएमएमएल की गिरल लिग्नाइट माइंस द्वारा की गई खुदाई से निकले बेंटोनाइट और मलबे को किसानों की खातेदारी जमीन डाल दिया गया है। जिसकी रिपोर्ट बनाकर दिसंबर 2025 में संभागीय आयुक्त को भेज दिया है। कंपनी द्वारा अतिवृष्टि का कारण दिया गया है।” – लक्ष्मणसिंह इंदा, पटवारी, कोटड़ा पटवार क्षेत्र। “कोटड़ा पटवार क्षेत्र में आरएसएमएमएल द्वारा किसानों के खेतों में मलबा डाला गया है तो इस संबंध में जांच करवाकर कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। साथ ही किसान खुद स्वयं भी अपने तथ्य पेश कर कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करवा सकता है। मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।” – राजेंद्रसिंह चांदावत, एडीएम, बाड़मेर


