उदयपुर के महाकाल मंदिर में बुधवार को ‘आदित्यार्क महोत्सव’ श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मंदिर परिसर वैदिक मंत्रोच्चारण से गुंजायमान रहा। महोत्सव के तहत बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने एकत्रित होकर भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की और उसके पश्चात प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य नारायण को विधि-विधान से अर्घ्य अर्पित किया। 11 वर्षों से जारी है परंपरा
उदयपुर के महाकाल मंदिर में यह आयोजन पिछले 11 वर्षों से लगातार किया जा रहा है। कार्यक्रम के संयोजक प्रदीप श्रीमाली ने बताया कि यह महोत्सव भारतीय वैदिक संस्कृति के मूल स्वरूप को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि आदि अनादिकाल से यह मान्यता है कि जब सूर्य उत्तरायण में प्रवेश करते हैं, तब उन्हें अर्घ्य देने से एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण होता है। यह आयोजन न केवल व्यक्तिगत उन्नति के लिए है, बल्कि इससे संपूर्ण राष्ट्र और जनमानस का कल्याण होता है। युवाओं को जोड़ने का संकल्प
समिति के संरक्षक गोविंद दीक्षित ने आयोजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पिछले एक दशक से महाकाल मंदिर में यह परंपरा निभाई जा रही है। हमारा मुख्य उद्देश्य आमजन को अपनी जड़ों और संस्कृति से जोड़ना है। उन्होंने विशेष रूप से जोर दिया कि यदि युवा वर्ग इस तरह के आयोजनों से जुड़ता है, तो वे उत्तम स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा के साथ जीवन में आगे बढ़ सकेंगे, जिससे अंततः विश्व का कल्याण होगा। कार्यक्रम की शुरुआत में सह-संयोजक नेमीचंद आचार्य ने मंदिर आए सभी भक्तों और प्रबुद्ध जनों का तिलक लगाकर और ऊपरना ओढ़ाकर भव्य स्वागत किया। महोत्सव के दौरान मुख्य पूजन और वैदिक मंत्रोच्चारण आचार्य पंडित नरेश श्रीमाली द्वारा संपन्न कराया गया। उनके सानिध्य में हुए इस अनुष्ठान में वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। इस धार्मिक समागम में शहर की कई गणमान्य हस्तियों ने शिरकत की। अतिथियों के रूप में शहर विधायक ताराचंद जैन, इंटक प्रदेशाध्यक्ष जगदीश राज श्रीमाली, बीजेपी उपाध्यक्ष अलका मुंदड़ा, श्रीमाली समाज (मेवाड़) के अध्यक्ष दिग्विजय श्रीमाली मौजूद रहे। सभी ने भगवान सूर्य और महाकाल के दर्शन कर देश की सुख-समृद्धि की कामना की।


