बालाघाट मुख्यालय सहित पूरे जिले में मकर संक्रांति का पावन पर्व आस्था के साथ मनाया गया। लोगों ने सूर्य को जल अर्पित कर पूजन किया। साल के पहले पर्व को लेकर लोगों में उत्साह देखा गया। परिवार के सदस्य पिकनिक स्थलों पर पहुंचे, जहां उन्होंने भोजन बनाया और साथ में पिकनिक का आनंद लिया। हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। पौष माह की शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व पर सूर्य उत्तरायण होते हैं और मकर राशि में प्रवेश करते हैं। मान्यता है कि इस दिन काले तिल और तिल से बनी चीजों का दान करने से पुण्य लाभ मिलता है। इस दिन तिल-गुड़ का भी विशेष महत्व होता है। धर्मावलंबियों ने घरों में तिल-गुड़ से बने लड्डू का भोग भगवान को अर्पित किया और परिवार के सदस्यों को प्रसाद के रूप में वितरित किया। नगरीय क्षेत्र के शंकरघाट, बजरंग घाट, महामृत्युंजय घाट और आमाघाट के अलावा गांगुलपारा जैसे पर्यटन स्थलों पर भी लोगों की भीड़ रही। यहां परिवारों ने आनंदपूर्वक पिकनिक मनाई। मकर संक्रांति पर पतंगबाजी का भी विशेष महत्व होता है। सुबह से ही मौसम साफ रहने के कारण आसमान में पतंगों का नजारा देखते ही बन रहा था। पतंगों की दुकानों पर भी काफी भीड़ देखी गई।


