कांग्रेस ने एसआईआर का विरोध करते हुए आरोप लगाया है कि प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद भी भाजपा के इशारे पर एक समुदाय विशेष के नाम मतदाता सूची में से कटवाए जा रहे हैं। सीएमओ से आई सूची में हर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस समर्थित 5 से 6 हजार वोटर्स को हटवाने को कहा गया है। वहीं, बड़ी संख्या में भाजपा समर्थित लोगों के नाम जोड़ने को कहा गया है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया कि राजस्थान में बड़े पैमाने पर लोकतंत्र की लूट की जा रही है। ये कोई साधारण राजनीतिक साजिश और एक राज्य का मामला नहीं है, ये लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा हमला है। बेहद चिंताजनक एवं अति-गंभीर जानकारी सामने आई है कि कांग्रेस के वोट काटने के उद्देश्य से मोदी सरकार और भाजपा शीर्ष स्तर पर योजनाबद्ध षड्यंत्र रचा गया है। जानकारी के मुताबिक केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के जयपुर दौरे के बाद मुख्यमंत्री आवास से एक पैन ड्राइव जारी की गई है, जिसमें प्रदेश की हर विधानसभा में कांग्रेस समर्थित 4 से 5 हजार वोट कटवाने का डेटा दिया गया है। कांग्रेस के जायज वोट काटने की साजिश है। कांग्रेस इस पर मीडिया के माध्यम से प्रदेश की जनता को पूरी जानकारी भी साझा करेगी। बड़ा खुलासा करेंगे। इधर, विधानसभा में विपक्षी सचेतक रफीक खान का आरोप है कि भाजपा एक समुदाय को टारगेट करके वोट कटवाना चाह रही है। बीएलओ ने जिन नामों को वेरिफाई कर दिया उन्हें वोटर लिस्ट से बाहर करा रहे हैं। बीएलओ पर इसके लिए दबाव बना रहे हैं। जो पहले नाम कट गए, उनको जोड़ने के लिए एक बूथ पर 50 का नाम जुड़वाने का टारगेट दे रहे हैं। यूपी में हर 5वां वोटर सूची से बाहर, राजस्थान में हर 13वां मतदाता हटा यूपी में एसआईआर का ड्राफ्ट लिस्ट से हर 5वां व्यक्ति वोटर लिस्ट से बाहर है। राजस्थान से इसकी तुलना करें तो हर 13वां वोटर बाहर हुआ है। राजस्थान में दस्तावेज दिखाने की केटेगरी में 11 लाख हैं, जिसका आंकड़ा कुल मतदाताओं की तुलना में हर 50वें व्यक्ति का रहा है। राजस्थान में 41.85 लाख वोटरों के यानी 7.66% नाम काटे गए जबकि यूपी में 2.89 करोड़ यानी 18% नाम कटे है। राजस्थान में 29.6 लाख वोट शिप्ट हुए जबकि डुप्लीकेट वोट 3.44 लाख था। वहीं राजस्थान में 5 करोड़ 46 लाख में से 5.04 करोड़ वोटर एसआईआर के बाद बचे हैं।


