बिजली संशोधन बिल के विरोध में बिजली कर्मियों, इंजीनियरों और पेंशनरों का चौथा जोनल रोष धरना

भास्कर न्यूज| लुधियाना लुधियाना के औद्योगिक क्षेत्र में बढ़ती लागत और बिजली संकट के बीच चैंबर ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल अंडरटेकिंग्स (सीआईसीयू) ने पंजाब राज्य बिजली नियामक आयोग (पीएसईआरसी) के समक्ष उद्योग का पक्ष मजबूती से रखा। 2024-25 के ट्रू-अप और भविष्य के टैरिफ निर्धारण पर आयोजित जनसुनवाई के दौरान सीआईसीयू अध्यक्ष अवतार सिंह आहूजा ने स्पष्ट किया कि लुधियाना पंजाब की आर्थिक रीढ़ है, जिसकी अनदेखी से रोजगार और निर्यात को भारी नुकसान होगा। चैंबर ने मांग की कि मांग पूर्वानुमान की गलतियों और शॉर्ट-टर्म बिजली खरीद का वित्तीय बोझ उद्योगों पर न डाला जाए, बल्कि ट्रू-अप प्रक्रिया पूरी तरह ऑडिटेड आंकड़ों पर आधारित होनी चाहिए। ज्ञापन के माध्यम से 2026-27 के लिए यथार्थवादी बिजली खरीद नीति, एटी एंड सी घाटे में कमी और क्रॉस-सब्सिडी घटाने पर जोर दिया गया। इसके अलावा, जमीनी समस्याओं जैसे बार-बार बिजली कटौती, वोल्टेज में उतार-चढ़ाव, 44 करोड़ रुपये के बकाया और स्टाफ की कमी को भी रिकॉर्ड पर रखा गया। सीआईसीयू ने पीक्यू मीटर संकट से राहत और पांच साल के फिक्स्ड टैरिफ की वकालत करते हुए कहा कि प्रतिस्पर्धी टैरिफ कोई रियायत नहीं बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था में निवेश है। अंत में, 160 करोड़ रुपये की इंफ्रास्ट्रक्चर योजना और तकनीकी नियुक्तियों जैसे व्यावहारिक सुझाव भी आयोग को सौंपे गए। 20 जनवरी को जालंधर में देंगे धरना: इसके साथ ही रोपड़ में स्वीकृत 800-800 मेगावाट की दो सुपरक्रिटिकल थर्मल यूनिटों पर काम शीघ्र शुरू करने की मांग की गई, ताकि बिजली बैंकिंग पर निर्भरता घटे और राज्य आत्मनिर्भर बने। संयुक्त एक्शन कमेटी ने 20 जनवरी 2026 को जालंधर में अगले जोनल रोष धरने की घोषणा करते हुए चेतावनी दी कि मांगें न मानी गईं तो पटियाला स्थित पावरकॉम मुख्यालय के सामने राज्य स्तरीय बड़ा धरना दिया जाएगा।

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