हनुमानगढ़ जंक्शन स्थित जल संसाधन विभाग का कार्यालय। (फाइल फोटो) भास्कर संवाददाता| हनुमानगढ़ जल संसाधन विभाग में आबयाना (सिंचाई कर) जमा नहीं करने वाले किसानों पर अब सख्ती की जाएगी। 31 मार्च 2025 तक का जिन किसानों का आबयाना बाकी है उनको नोटिस जारी किए जा रहे हैं। जल संसाधन उत्तर जोन में 64 करोड़ रुपए आबयाना बाकी है। हनुमानगढ़ में भाखड़ा प्रणाली के खंड प्रथम और द्वितीय में करीब 25 करोड़ रुपए की राशि बाकी है। सरकार ने निर्देश दिए हैं कि आबयाना जमा नहीं करने वाले कृषकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। इसको देखते हुए विभागीय अभियंताओं द्वारा बकायादारों की सूची तैयार की जा रही है। प्रत्येक वितरिका पर किन किसानों की कितनी राशि बाकी है उसकी पूरी सूची तैयार की जा रही है। इसके साथ ही जल उपयोक्ता संगम के अध्यक्षों के माध्यम से नोटिस दिए जा रहे हैं। जल संसाधन खंड प्रथम हनुमानगढ़ के अधिशासी अभियंता मुकेश सिहाग और जल संसाधन खंड द्वितीय के अधिशाषी अभियंता हरिसिंह ने बताया कि पटवारियों के माध्यम से भी नोटिस तामील करवाए जा रहे हैं। अब तक लगभग 1200 किसानों को नोटिस दिए जा चुके हैं। कई किसानों का 5 वर्षों से भी ज्यादा का सिंचाई कर बाकी है। उनसे 12 प्रतिशत ब्याज सहित राशि वसूल की जाएगी। नोटिस में आबयाना राशि जमा नहीं करवाने पर बारी काटने की चेतावनी भी जारी की जा रही है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार सरकार के सख्त निर्देशानुसार आबयाना जमा नहीं करवाने वाले किसानों को किसी तरह की रियायत नहीं दी जाएगी। इंदिरा गांधी नहर परियोजना और भाखड़ा प्रणाली से हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिले में बड़ा रकबा सिंचित होता है। दोनों जिलों में आईजीएनपी से 3 लाख 76 हजार 642 हेक्टेयर और भाखड़ा प्रणाली में 2 लाख 92 हजार 647 हेक्टेयर में सिंचाई होती है। अकेले हनुमानगढ़ जिले में भाखड़ा प्रणाली से 2 लाख 2 हजार 53 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होती है। हनुमानगढ़ तहसील में 66 हजार 503 हेक्टेयर, संगरिया में 55 हजार 273 हेक्टेयर, टिब्बी में 31 हजार 511 हेक्टेयर और पीलीबंगा तहसील में 48 हजार 766 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होती है। श्रीगंगानगर जिले की 4 तहसीलों में भाखड़ा प्रणाली से सिंचाई होती है। सर्वाधिक 63 हजार 177 हेक्टेयर रकबा सादुलशहर तहसील में सिंचित होता है। पदमपुर तहसील में 1029 हेक्टेयर, सूरतगढ़ तहसील में 25 हजार 562 हेक्टेयर और श्रीविजयनगर में 827 हेक्टेयर में सिंचाई होती है। सिंचित क्षेत्र में ही फसलवार अलग-अलग आबयाना राशि तय है। राज्य सरकार द्वारा 27 वर्षों से सिंचाई शुल्क (आबयना) में भी कोई बढ़ोत्तरी नहीं की गई है। राज्य सरकार ने 24 मई 1999 को सिंचाई शुल्क की संशोधित दरें लागू की थी। इसके अनुसार प्रत्येक फसल के लिए प्रति बीघा सिंचाई कर लागू है। यह राशि भी नाम मात्र की है। इसके बावजूद किसान आबयाना जमा करवाने में रुचि नहीं ले रहे। चावल पर प्रति बीघा 50 रुपए, गेहूं पर 37.50 रुपए आबयाना राज्य सरकार द्वारा सिंचित क्षेत्र में रबी और खरीफ फसलों के लिए प्रति बीघा के अनुसार अलग-अलग दरें लागू की गई है। जानकारी अनुसार गन्ना की फसल पर प्रति बीघा 72.50 रुपए, चावल पर 50 रुपए, बाग पर प्रति वर्ष 91.25 रुपए प्रति बीघा शुल्क निर्धारित है। इसी तरह कपास, नरमा, सिंघाड़ा, जीरा, रिजका पर 45 रुपए प्रति बीघा, गेहूं पर 37.50 रुपए, रबी की अन्य फसलों पर 32.90 रुपए प्रति बीघा, खरीफ की अन्य फसलें व तेल के बीज की फसल पर 28.75 रुपए प्रति बीघा, सब्जी, गोचनी, बेजड़, चना की दो बारी पर 27.50 रुपए, चारा पर 22.50 रुपए प्रति बीघा, जौ, ग्वार, दलहनी फसलों पर 20 रुपए, चना की एक बारी पर 15.75 रुपए, मक्का, बाजरा, ज्वार पर 16 रुपए प्रति बीघा सिंचाई शुल्क निर्धारित है। ^आबयाना जमा नहीं करवाने वालों की कटेगी बारी, नोटिस जारी किए जा रहे: आबयाना जमा नहीं करवाने वाले किसानों को अंतिम नोटिस जारी कर बकाया जमा करवाने की अपील की जा रही है। 2 या इससे अधिक फसलों का आबयाना बाकी है उन सभी को नोटिस तामील करवा रहे हैं। 21 जनवरी के बाद बारी काटने की कार्रवाई की जाएगी। मुकेश सिहाग, एक्सईएन जल संसाधन खंड प्रथम, हनुमानगढ़ ^खंड में 11 करोड़ से ज्यादा बकाया, सभी को नोटिस दे रहे, बारी कटेगी: जल संसाधन खंड द्वितीय में करीब 11 करोड़ रुपए आबयाना बाकी है। प्रत्येक वितरिका वाइज बकायादारों की सूची तैयार कर नोटिस जारी किए जा रहे हैं। सरकार के सख्त निर्देश होने के कारण आबयाना वसूली में कोई कोताही नहीं बरती जा रही। 12 प्रतिशत ब्याज सहित आबयाना जमा करवाना होगा। हरि सिंह, एक्सईएन जल संसाधन खंड द्वितीय, हनुमानगढ़


