अरावली पर्वत श्रृंखला को बचाने की मांग को लेकर बुधवार को पर्यावरण कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक अलवर में एकत्र हुए। प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर के माध्यम से भारत के प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए पूरे अरावली क्षेत्र में खनन गतिविधियों पर तत्काल और पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने अलवर व आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय जमीनी पर्यावरण कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर अरावली पहाड़ियों में हो रहे तेज़ क्षरण और अवैध खनन पर गहरी चिंता जताई। कार्यकर्ता विष्णु चावड़ा ने कहा कि अरावली पर्वत श्रृंखला मरुस्थलीकरण के विरुद्ध प्राकृतिक ढाल है और उत्तर-पश्चिम भारत के लिए एक प्रमुख भूजल रिचार्ज क्षेत्र भी है। इसके बावजूद निरंतर खनन से इस प्राचीन पर्वत श्रृंखला का अस्तित्व गंभीर संकट में है। पर्यावरण कार्यकर्ता वैशाली राणा ने कहा कि अरावली केवल पहाड़ नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के फेफड़े और जल सुरक्षा का आधार है। उन्होंने चेतावनी दी कि स्थिति अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है और यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो इसके दूरगामी और विनाशकारी परिणाम सामने आएंगे। ज्ञापन में विशेष रूप से गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली—इन चार राज्यों में अरावली पहाड़ियों के भीतर कानूनी और अवैध, दोनों प्रकार के खनन पट्टों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई। इसके साथ ही पूरी अरावली श्रृंखला को “संरक्षित पारिस्थितिक क्षेत्र” घोषित करने तथा पहले से क्षतिग्रस्त क्षेत्रों के पुनर्वास और वनीकरण के लिए सरकार समर्थित ठोस कार्ययोजना लागू करने की मांग भी की गई।


