20 लोगों की जान लेने वाला दंतैल हाथी शांत, दूसरे हाथी अशांत, गांव में तोड़ रहे घर

भास्कर न्यूज | चाईबासा/हाटगम्हरिया जनवरी 2026 की पहली तारीख से 9 जनवरी तक 20 लोगों की जान लेने वाला हाथी सात दिनों से गायब है। झारखंड-ओडिशा बॉर्डर से 9 जनवरी की रात से वह गायब है। तीन दिन पहले ओडिशा में लोकेशन मिला था, लेकिन सटीक नहीं। यह दंतैल हाथी सात दिनों में कोई क्राइम करता नहीं दिखा है। लेकिन अन्य हाथी पश्चिमी सिंहभूम के मझगांव, केंदपोसी, नोवामुंडी, जगन्नाथपुर में तांडव मचा रहे हैं। एक दंतैल हाथी मझगांव के हलदिया, तेलोकुटी गांव की तरफ है। वन विभाग का दावा है कि यह वह दंतैल हाथी नहीं है। बहरहाल सातवें दिन भी वन विभाग की टीम रोजाना शाम को संभावित ओडिशा झारखंड के बॉर्डर इलाके में पहरा दे रही है। डीएफओ आदित्य नारायण सहित तमाम टेक्निकल टीम, मेडिकल टीम, वनकर्मी मौजूद हैं। वन विभाग का कहना है कि जब तक खौफ का माहौल खत्म नहीं होता टीम कैंप करेगी। टोंटों प्रखंड के नीमडीह में गुरुवार की रात हाथियांे के एक झुंड ने एक झोपड़ी को पूरी तरह उजाड़ दिया है। इस झोपड़ी में जमादार बलमुचू सहित उसकी पत्नी और चार बच्चे सोए हुए थे। घटना शाम के साढ़े सात बजे की है। घटना के वक्त परिवार घर के अंदर सोने की तैयारी कर रहा था। रात को सभी बचकर भागे। रातभर दूसरे के घर में सोए रहे। वहीं उसी गांव में तीन घरों को तोड़ दिया है। शाम होते ही मशाल लेकर गश्त कर रहे वनकर्मी : नौ जनवरी 2026 से गायब जानलेवा दंतैल हाथी की खोज रोजाना शाम को हो रही है। पारी-पारी से हाथी भगाने वाले, क्यूआरटी टीम शाम होते ही अलग-अलग सूचनाओं पर मूव कर रही है। ट्रैंकुलाइज्ड एक्सपर्ट नोवामंुंडी में कैंप कर रहे हैं। ^जो उग्र हाथी था उसका पता नहीं चल रहा है। मझगांव में जो दंतैल दिखा है वह दूसरा है। वह शांत है। हम जिस हाथी की तलाश में हैं वह 7 दिनों से ट्रैक नहीं हो पा रहा है। दोनों राज्यों की टीम उसे खोज रहे है। टीम अभी कैंप करेगी। – प्रशांत विभास्कर, आईएफएस, ऑपरेशन हेड मझगांव में दंतैल हाथी के हमले में तीन लोगों की जान जाने के बाद दूसरे हाथियों का उत्पात बढ़ गया है। तीन दिनों में 10 से ज्यादा घरों को हाथी ने तोड़ दिया है। वहीं गुरुवार की रात को भी दामोदरसाई में ब्रजमोहन पिंगुवा के घर को हाथी ने तोड़ दिया। घर में एक दुकान चलता था। सामान तोड़ दिया और पांच क्विंटल से ज्यादा धान खा गए। एक बोरा चना भी खा गए। उसी गांव में धनुर्जय पिंगुवा के घर को भी तोड़ दिया। ग्रामीणों के मशाल दिखाने और वन विभाग की टीम पहुंचने पर हाथी भाग गया।

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