तरनतारन एडिशनल सेशन जज प्रेम कुमार की अदालत ने एसटीएफ अमृतसर द्वारा दर्ज किए 5 किलो हेरोइन की बरामदगी के मामले को झूठा करार दिया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फिरोजपुर के गांव दुलची के निवासी आरोपी गुरमुख सिंह, गांव निहाला किलचा निवासी सोनू सिंह और बलदेव सिंह को मामले में बाइज्जत बरी कर दिया। यह केस 3 साल और 3 माह से चल रहा था, जबकि आरोपी जेल में बंद थे। एसटीएफ ने 15 अक्टूबर, 2022 को गुरमुख और सोनू पर मामला दर्ज किया था। पुलिस का दावा था कि दोनों एक्टिवा पर गांव तलवंडी सोभा सिंह के पास आ रहे थे और तलाशी के दौरान एक्टिवा की डिग्गी से 5 किलो हेरोइन मिली थी। सुनवाई के दौरान गुरमुख सिंह के वकील मनोज बजाज और मेहर सिंह मल्ल ने अदालत में मोबाइल की लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज पेश की। लोकेशन से स्पष्ट हुआ कि जिस जगह पुलिस ने गिरफ्तारी दिखाई थी, गुरमुख वहां मौजूद ही नहीं था। इसके अलावा सीसीटीवी फुटेज में देखा कि गुरमुख बाइक पर सवार था, न कि एक्टिवा के पीछे बैठा था। अब केस दर्ज करने वाले अधिकारी जांच के घेरे में आ गए हैं। तत्कालीन एआईजी रछपाल सिंह अब जेल में बंद है, जबकि कार्रवाई में डीएसपी वरिंदर महाजन और इंस्पेक्टर विनोद कुमार भी शामिल थे। मामले में पुलिस ने अन्य आरोपी बलदेव सिंह को नामजद किया था, जो पहले से ही जेल में बंद था। इस फैसले के बाद गुरमुख के भाई हरभजन सिंह ने कहा कि साढ़े 3 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद निर्दोषों को न्याय मिला है।


