उच्च शिक्षा विभाग ने परंपरागत विश्वविद्यालयों से संबद्ध 20 सरकारी कॉलेजों में बीएससी एग्रीकल्चर कोर्स शुरू कर दिया है। ये कॉलेज भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के मापदंड पूरे नहीं करते। इनके पास न तो कृषि भूमि है, न प्रयोगशालाएं हैं और न ही यहां कृषि वैज्ञानिक नियुक्त हैं। विभाग ने इसकी चिंता किए बगैर कॉलेजों को आदेश दिया है कि आसपास के किसानों से एमओयू करें और उनकी जमीन पर छात्रों को प्रैक्टिकल कराएं। सिंचाई, ट्रैक्टर और अन्य संसाधनों की व्यवस्था भी किसानों से कराएं। कृषि वैज्ञानिकों की नियुक्ति के बजाय कहा गया है कि तीन-तीन अतिथि विद्वानों को बुलाकर पढ़ाई कराएं। हैरानी की बात यह है कि प्रदेश में पहले से जबलपुर और ग्वालियर में शासकीय कृषि विश्वविद्यालय हैं। इनके अंतर्गत दशकों से सिर्फ 10 कॉलेजों में ही बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई हो रही है। अब परंपरागत विश्वविद्यालयों से संबद्ध इससे दोगुने कॉलेजों में अचानक कोर्स शुरू करा दिया गया है। यहां बता दें कि पिछले साल जिन कॉलेजों में कोर्स शुरू हुए, उनमें ज्यादातर ने ऐसे किसानों से एमओयू कर लिए, जिनके खेत 20-25 किलोमीटर दूर हैं। लिहाजा, नियमित प्रैक्टिकल हो ही नहीं पाए। सवाल.. विद्यार्थी रोज 15-20 किमी दूर कैसे जाएंगे नहीं हो पा रहे किसानों से एमओयू राजधानी में ही तस्वीर बदहाल भास्कर एक्सपर्ट – प्रो. विजय सिंह तोमर, पूर्व कुलपति, कृषि विवि जबलपुर व ग्वालियर एग्रीकल्चर का इंजीनियरिंग जैसा हाल होने की आशंका गलत निर्णयों से इंजीनियरिंग का जो हाल हुआ, वैसा ही इस फैसले से एग्रीकल्चर का हो सकता है। क्योंकि इस शिक्षा के लिए राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर मानिटरिंग के लिए कोई अपेक्स बॉडी नहीं है। आईसीएआर है, लेकिन उससे एक्रीडिटेशन लेना अनिवार्य नहीं है। परंपरागत कॉलेजों की लैब में कृषि के प्रैक्टिकल संभव नहीं है। किसान से एमओयू कर भी लें तो किसान अपनी जमीन पर अनुसंधान की मंजूरी क्यों देगा? छात्र रोज 20 किमी कैसे जाएंगे? यह कोर्स अनुसंधान आधारित है। बिना अनुसंधान डिग्री देने का लाभ नहीं है। … और कॉलेजों की ये दलील
कॉलेजों का तर्क है कि शुरुआती दो वर्ष की पढ़ाई वे बॉटनी सहित लाइफ साइंस से जुड़े अन्य विषयों की लैब के जरिए करा सकते हैं। जबकि विशेषज्ञ बताते हैं कि बीएससी एग्रीकल्चर (ऑनर्स) के पहले से चौथे सेमेस्टर तक हॉर्टिकल्चर, प्लांट बायोकैमिस्ट्री, बायोटेक्नोलॉजी, फॉरेस्ट्री जैसे विषय हैं। इनमें फील्ड-लैब प्रैक्टिकल जरूरी है। कॉलेजों में इनके लिए लैब नहीं हैं। फील्ड में उपयोग के संयंत्र किसी कॉलेज में नहीं हैं। अभी शुरुआत है, समस्याएं हल करेंगे अभी शुरुआत है। जो भी समस्याएं आएंगी, उनका समाधान करेंगे। कोर्स ठीक से संचालित हों, इसके लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं कराई जाएंगी। कॉलेजों को कम से कम तीन सब्जेक्ट एक्सपर्ट गेस्ट फैकल्टी रखने के निर्देश दिए जा चुके हैं। – इंदर सिंह परमार, उच्च शिक्षा मंत्री


