रूपनगर नगर परिषद द्वारा पंजाबी युवाओं और किसानों के कारोबार पर की गई एकतरफा कार्रवाई के विरोध में शनिवार को शहर में भारी रोष प्रदर्शन हुआ। प्रशासन की इस कार्रवाई के खिलाफ किसान संगठन, स्थानीय व्यापारी और आम नागरिक एकजुट हो गए। सभी संगठनों ने मिलकर न केवल प्रशासन की नीतियों का विरोध किया, बल्कि ज्ञानी जैल सिंह नगर ग्राउंड में युवाओं और किसानों का कारोबार दोबारा शुरू करवाकर अपनी एकजुटता का परिचय दिया। प्रदर्शन में पंजाब मोर्चा, भारतीय किसान यूनियन (बहराम के), शेर-ए-पंजाब किसान यूनियन और मार्केट कमेटी के प्रतिनिधि शामिल हुए। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि नगर परिषद ने बिना किसी ठोस विकल्प के युवाओं के सामान पर कार्रवाई की, जो पूरी तरह तानाशाही है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की गलत नीतियों के कारण पहले से ही आर्थिक तंगी झेल रहे युवाओं और किसानों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। किसान मंडी हटाने का कड़ा विरोध नेताओं ने ज्ञानी जैल सिंह नगर में स्थापित किसान मंडी/ऑर्गेनिक मंडी को हटाकर सड़क किनारे या फुटपाथ पर भेजने के प्रस्ताव की कड़ी निंदा की। उन्होंने तर्क दिया कि किसान मंडी के माध्यम से शहरवासियों को सस्ती और ताजी सब्जियां मिलती हैं। इसे हटाना केवल किसानों के साथ ही नहीं, बल्कि आम जनता के साथ भी अन्याय है। किसान अन्नदाता है, उसे फुटपाथ पर बैठने के लिए मजबूर करना निंदनीय है। 40 साल पुराने नियमों का दिया हवाला पंजाब मोर्चा के संयोजक गौरव राणा ने बताया कि पंजाब राज्य मंडी बोर्ड के लगभग 40 साल पुराने नियमों के अनुसार, सरकार और प्रशासन का यह कर्तव्य है कि वे किसान मंडियों को प्रोत्साहित करें और उन्हें स्थायी स्थान व बुनियादी सुविधाएं प्रदान करें। उन्होंने अफसोस जताया कि प्रशासन नियमों को लागू करने के बजाय किसानों को प्रताड़ित कर रहा है। व्यापारियों का समर्थन और आंदोलन की चेतावनी इस मौके पर शहर के कई दुकानदारों और व्यापारियों ने भी किसानों का समर्थन किया और उन्हें मंडी लगाने के लिए हरसंभव सहयोग देने की घोषणा की। संगठनों ने रूपनगर के डिप्टी कमिश्नर और स्थानीय विधायक से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि किसान मंडी को उसी स्थान पर सम्मानपूर्वक बहाल नहीं रखा गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।


