मलसियां बाजन में नशा करते दिखे युवक, सिरिंज, फॉयल भी मिले, सरपंच बोले-गांव में नशा नहीं बिकता

हम गरीब थे, पर सुकून में थे, क्योंकि पति मुख्तियार सिंह किसानी करते थे। 6 बेटों की हंसी से घर गूंजता था। कोई कहता कि अफसर बनूंगा, कोई कारोबारी। ये कहानी करीब 2010 के पहले की थे। इसी के बाद हमारे परिवार में नशा घुसा और 2012 सबसे पहले पति को ले गया। छोटे-छोटे बच्चे पूछते रहे “मां, पापा को क्या हो गया?” मेरे पास जवाब नहीं था। तब लगा कि नशा सिर्फ बुरी आदत नहीं, जहर है। बेटे कुलवंत को भी नशे की लत लगी। मलसियां बाजन से बच्चे मजदूरी के पैसे से लाकर नशा करते। मैंने हाथ जोड़कर समझाया, तेरे पापा ऐसे ही चले गए, मान जा।” 2013 में बेटा भी चला गया। मैं रोती गिड़गिड़ाती बच्चों को समझाती रही “जहर से दूर रहो।” लेकिन आसपास के लोग मेरे बच्चों को उसी रास्ते पर ले जाते रहे। किसी ने ध्यान नहीं दिया। 2021 मार्च में बेटे गुरदीप की मौत हुई। मैं सदमे से निकली भी नहीं थी कि जुलाई में जसवंत भी चला गया। मैं तस्वीरें देखकर रोती रहती। नवंबर 2022 में राजू भी चला गया और मार्च 2023 में बलजीत सिंह की भी नशे से ही मौत हुई। अब सहारा था- जसवीर। मैं रोज कहती थी कि बेटा बाहर मत जाया कर। मैं हर फोन कॉल से हर शाम से डरती थी। 15 जनवरी को फोन आया तो मैं भागती हुई मलसियां बाजन पहुंची। वहां जमीन पर जसवीर की लाश थी। उस पल मैं खत्म हो गई। पंच, सरपंच, नेता सब चुनाव में कहते थे कि नशा खत्म कर देंगे। लेकिन नशे ने मेरा परिवार खत्म कर दिया। नशा बेचने और उन्हें पकड़ने वाले मिले हुए हैं। सिस्टम ईमानदार होता, तो मेरे छह बच्चों की लाशें न उठतीं। आज घर में एक छोटा बच्चा और विधवा बहू है। मैं पढ़ी-लिखी नहीं हूं, लेकिन जानती हूं कि अगर गांव में नशा बिक रहा है, तो पुलिस जानती है। बच्चे नशा कर रहे हैं, तो पंचायत जानती है। मौतें हो रही हैं, तो नेता जानते हैं। फिर भी सब चुप हैं। मैं ये कहानी इसलिए सुना रही हूं ताकि कोई और मां ऐसा मंजर न देखे। – जैसा शिंदर कौर, शेरपुर कलां, ने अजय कुमार शुक्ल को बताया फोटो. कंवलदीप डंग मलसियां बाजन में नहर किनारे नशा करते युवा। नशे की सबसे बड़ी त्रासदी से गुजर रही मां की आप बीती पढ़िए… कैसे खुशहाल जिंदगी को बेरंग कर गया चिट्टा भास्कर फर्स्ट पर्सन एक ही परिवार के सात लोगों की नशे से हुई मौत के बाद भास्कर टीम शेरपुर गांव पहुंची। गांव में लोगों ने माना यहां नशे का कारोबार आम हो चला है। लोगों ने कहा कि आसपास में नशे की सप्लाई मलसियां बाजन से होती है। गांव वालों ने आरोप लगाया कि नशे का नेटवर्क चलाने में जसवीर सिंह और उसकी प|ी कुलविंदर कौर गोगा का नाम ही प्रमुखता से आता है। जसवीर सिंह के खिलाफ सात मुकदमे हैं। छह मामलों में वह छह महीने से ज्यादा जेल में नहीं रहा। हर बार जमानत मिलती रही। 9 तारीख को सातवें मुकदमे में उसे जेल भेजा गया, लेकिन उसके बाद उसकी पत्नी कुलविंदर सप्लाई संभालने लगी जो अभी जसवीर की मौत मामले में फरार चल रही है। गांव में मंजीत कौर प|ी मंगल मिलीं। उन्होंने बताया कि वह जसबीर के ताया की बेटी हैं। उसके पति मंगल की भी इसी साल नशे से मौत हुई है। पड़ोस में अर्जन का घर है। उसकी मां ने बताया कि बेटा नशा करता था। पुलिस ने मौत का कारण हार्ट अटैक बताया। भास्कर टीम आगे बढ़ी तो नहर के उस पार कुछ लोग संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त थे। कैमरा देखते ही लोग भाग निकले। वहां पहुंचने पर जमीन पर पन्नी, सिरिंज और फॉयल पेपर पड़े मिले। गांव वालों ने आरोप लगाया कि पूर्व चौकी इंचार्ज सुखमंदर सिंह जैतो के खिलाफ ग्रामीणों ने एसएसपी अंकुर यादव को चिट्ठी लिखी थी, जिसके बाद वहां नया इंचार्ज लगाया गया। उसके 148/2025 के मामले में चालान पेश नहीं करने से आरोपी छह महीने में ही जमानत पर बाहर आ गए। सुखमंदर सिंह सस्पेंड है। यहां एक ग्रामीण ने कहा कि मलसियां बाजन गांव में एक दंपती नहर के किनारे सरकारी जमीन से नशे का कारोबार चलाता है। दूसरी ओर शेरेवाला गांव के सरपंच जगदीप सिंह कहते हैं उनके गांव में नशा नहीं मिलता। लोग दूसरे इलाके से नशा लाते होंगे। रूरल पुलिस बड़े अपराधियों को ट्रेस कर रही है। आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। लुधियाना रूरल के एसपी राजन कुमार ने कहा कि ग्राउंड पर लगातार युद्ध नशे विरुद्ध के तहत सर्वे किया जाता है। अलग-अलग मामलो में टीमें बनाई हैं ताकि किंगपिन तक पंहुचा जा सके।

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