भास्कर न्यूज | गढ़वा भारत के सर्वोच्च न्यायालय की मेडिएशन और कंसिलिएशन प्रोजेक्ट कमेटी (एमसीपीसी) के मार्गदर्शन में संचालित मेडिएशन फॉर द नेशन 2.0 विशेष मध्यस्थता अभियान को लेकर जिले में तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू कर दी गई हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए), गढ़वा के अध्यक्ष सह प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज प्रसाद के मार्गदर्शन में इस अभियान को जन-आंदोलन बनाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर दिया जा रहा है। अभियान के मुख्य मंत्र कोर्ट-कचहरी से मुक्ति की ओर मध्यस्थता 2.0 का नया दौर के साथ डीएलएसए सचिव निभा रंजना लकड़ा ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य न्यायालयों में लंबित मामलों का आपसी सहमति और सौहार्दपूर्ण संवाद के माध्यम से त्वरित निष्पादन करना है। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता न केवल समय बचाती है, बल्कि कड़वाहट को खत्म कर रिश्तों को फिर से जोड़ने का काम करती है। अभियान के तहत विभिन्न श्रेणियों के विवादों को शामिल किया गया है, ताकि समाज के हर वर्ग को इसका लाभ मिल सके। मुख्य रूप से वैवाहिक विवाद के मामले, दुर्घटना क्लेम के मामले, घरेलू हिंसा के मामले, चेक बाउंस के मामले, सर्विस से जुड़े मामले, समझौते लायक आपराधिक मामले, उपभोक्ता विवाद के मामले, कर्ज वसूली के मामले, बंटवारे के मामले, बेदखली के मामले, भूमि अधिग्रहण के मामले व अन्य उपयुक्त सिविल मामले इस अभियान के तहत लिए जाएंगे। सचिव ने बताया कि मेडिएशन फॉर द नेशन 1.0 के अनुभवों के आधार पर तैयार की गई संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का कड़ाई से अनुपालन किया जा रहा है। इससे मामलों की सुनवाई और समझौते की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी होगी। प्राधिकार की ओर से लंबी कानूनी प्रक्रियाओं के बजाय मध्यस्थता के इस सुलभ और मुफ्त विकल्प को अपनाने की अपील जिलेवासियों से की गई। इससे न केवल व्यक्तिगत विवादों का अंत होगा, बल्कि न्यायालयों पर बढ़ते मुकदमों के बोझ को कम करने में भी सहयोग मिलेगा।


