इंदौर में अ.भा. अखंड वेदांत संत सम्मेलन का शुभारंभ:बांग्लादेश में हो रहे अत्याचारों के विरोध में दो जगदगुरुओं की गर्जना, बोले–‘कड़े कदम उठाएं’

बिजासन रोड स्थित अविनाशी अखंड धाम आश्रम पर रविवार को 57वें अ.भा. अखंड वेदांत संत सम्मेलन का शुभारंभ देश के दो प्रमुख जगदगुरुओं की गर्जना के साथ हुआ। इनमें पहले रामस्नेही संप्रदाय के जगदगुरु आचार्य स्वामी रामदयाल महाराज ने जहां बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज बुलंद की, वहीं भानपुरा पीठ के जगदगुरू शंकराचार्य ने भी लव जिहाद एवं बांग्लादेश में हो रही हिंसा के विरोध में कठोर शब्दों में विश्व मानव आयोग एवं भारत सरकार से कड़े कदम उठाने तथा वहां हो रहे अत्याचारों को तत्काल रोकने की आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म कभी नष्ट नहीं हो सकता। उच्च पदों पर बैठे लोगों को अपनी जिम्मेदारी समझना चाहिए। शंकराचार्यजी ने लव जिहाद की बढ़ती घटनाओं पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह खतरनाक खेल है, इससे अपने बच्चों को बचाकर रखना होगा। संत सम्मेलन का शुभारंभ आश्रम के महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी चेतन स्वरूप के सानिध्य में जगदगुरु शंकराचार्य भानपुरा पीठाधीश्वर स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ की अध्यक्षता और रामस्नेही संप्रदाय के जगदगुरु आचार्य स्वामी रामदयाल महाराज एवं वृंदावन से आए आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। प्रारंभ में ओंकारद्विज संस्कृत विद्यालय से आए वेदपाठी बटुकों ने आचार्य पं. कल्याणदत्त शास्त्री के निर्देशन में मंगलाचरण प्रस्तुत किया। स्वागत की श्रृंखला में आश्रम के संत स्वामी राजानंद, आयोजन समिति के अध्यक्ष हरि अग्रवाल, संयोजक किशोर गोयल, भावेश दवे, अशोक गोयल, सचिन सांखला, राजेन्द्र गर्ग, राजेन्द्र सोनी, ज्योति श्रीवास्तव, सुश्री किरण ओझा, राजेश गर्ग, शिव जिंदल, नवनीत शुक्ला, ओमप्रकाश नरेड़ा, शैलेन्द्र मित्तल, महेन्द्र विजयवर्गीय, राजेन्द्र मित्तल आदि ने सभी संतों का स्वागत किया। इसके पूर्व आश्रम के प्रवेश द्वार पर संतों के आगमन पर दिग्विजय सांखला, रणधीर दग्धी, शिवरतन सांखला, प्रो. गोविंद सिंघल, बी.एम.सोनी आदि ने पुष्प वर्षा कर अगवानी की। परमात्मा का नाम ही आनंद और परमानंद स्वरूप सम्मेलन में महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद ने कहा कि परमात्मा का नाम ही आनंद और परमानंद स्वरूप है। परमात्मा नित्य भी हैं और अविनाशी भी हैं। संत परमात्मा के ही अंश होते हैं। अखंड धाम आश्रम के संस्थापक ब्रह्मलीन अखंडानंद के दर्शन मात्र से ही लोगों के असंख्य कष्ट दूर होते थे। उनका जीवन दूसरों के लिए ही समर्पित रहा। शिवोहम महामंत्र के द्वारा उन्होंने सबके कल्याण का सहज मार्ग बताया है। साध्वी कृष्णानंद ने भी वेदांत की महिमा और संतों की भूमिका पर अपने प्रभारी विचार व्यक्त किए।अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के जगदगुरू आचार्य स्वामी रामदयाल महाराज ने कहा कि वेदांत अमृत है। मोह-माया और ममता को मिटाने का सबसे आसान मार्ग वेदांत ही हैं। वेदांत का दर्शन सनातन धर्म, गुरू और धर्मग्रथों को समझाता है। वर्तमान में भक्ति की नहीं, बल्कि मानवता की जरूरत है। यदि मनुष्य होते हुए भी हममें मानवता के गुण नहीं हैं तो फिर ऐसी भक्ति की क्या लाभ । भारत राम और कृष्ण के साथ संतों और महात्माओं का भी राष्ट्र है। पूरे विश्व में भारत को ही भारत माता का गौरव प्राप्त है। गुरू की कृपा कल्पवृक्ष के समान होती है। शिष्य में श्रद्धा और निष्ठा गुरू की कृपा से ही प्राप्त होगी। आज बांग्लादेश में एक वर्ग विशेष के लोग सनातनियों पर अत्याचार कर रहे हैं, जबकि दिल्ली का ईमाम फतवा जारी करता है तो सारे मुस्लिम उसका पालन करते हैं, लेकिन हमारे यहां यदि शंकराचार्य कोई उपदेश, संदेश देते हैं तो उस पर अमल नहीं होता यह हमारी कमजोरी है। साधु, शिक्षक और सैनिक राष्ट्र को सजग करने वाले प्रहरी होते हैं। विज्ञान तो गगन के चांद को चूमने की शिक्षा देता है परन्तु वेदांत शांति और सदभाव की ओर ले जाता है। मोबाईल के चक्कर में फंसकर हम भौतिकवाद में फंस रहे हैं। वर्तमान में हमें आवश्यकता है जागृत होने की। विडंबना है कि सरकार की एजेंसियां भी बांग्लादेश के मामले में कुछ कड़े कदम नही उठा रही है। ऐसी एजेंसियों को तो तत्काल बंद कर देना चाहिए। अज्ञान के समूल नाश का काम करते हैं गुरु जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ ने कहा कि अज्ञान के समूल नाश का काम गुरु ही करते हैं। गुरु के नाम और रूप को लेकर कभी भी कोई विवाद नहीं करना चाहिए। जब तक आकाश और धरती रहेंगे तब तक सनातन धर्म भी रहेगा। वेदांत का कभी अंत नहीं होता। हमारा सनातन वंश नष्ट नहीं हो सकता। सनातन धर्म में अच्छे संस्कारों से ही श्रेष्ठ संतान बनती है, जो लोग उच्च पदों पर बैठे हैं उन्हें अपनी जिम्मेदारी समझना चाहिए। आज कुछ धर्म विशेष के लोग हमारा खून पी रहे हैं, इसलिए सत्य सनातन के स्वरूप में हमें भी आना होगा तभी अपराध करने वाले जघन्य अपराधियों को कठोर सजा मिल पाएगी। यह आत्मा सच्चिदानंद है। आज विश्व मानव आयोग को बांग्लादेश के मामले में कड़े कदम उठाने की जरूरत है, लेकिन हिन्दुओं पर लगातार अत्याचार लगातार बढ़ते जा रहे हैं। यह हम सबके लिए असहनीय और पीड़ादायक स्थिति है। संत सम्मेलन में स्वामी नारायणानंद, स्वामी परमानंद, स्वामी जगदीशानंद सहित अखंड धाम से जुड़े संतों ने अपने विचार व्यक्त किए। संत सम्मेलन में सोमवार, 16 दिसंबर को दोपहर 2 बजे से कार्रवाई शुरू होगी। जगदगुरू शंकराचार्य एवं अन्य सभी प्रमुख संत उपस्थित रहेंगे।

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