टोंक | कोल्हू पर जुते बैल से घाणी चलाकर तिलहन से तेल निकालने की तकनीक अब पुरानी पड़ गई है। घाणी से तेल निकालने के लिए अब बैल की जगह बाइक ने ले ली है। आज भी लोग स्वचलित एक्सपेलर की जगह कच्ची घाणी से निकले तिल और मूंगफली-खोपरे के तेल को सर्दियों में खाने के उपयोग में लेना पसंद कर रहे हैं। भीलवाड़ा जिले के मांडल से टोंक आए निर्मल तेली का कहना है कि तिल्ली का शुद्ध तेल 340 रुपए प्रति किलो तक खूब बिक रहा है, जबकि तिलकुटा के 240 से 280 रुपए प्रति किलो तक का भाव है। पारंपरिक स्वाद और गुणवत्ता के कारण लोग इसे विशेष रूप से पसंद कर रहे हैं। शहर आने वाले लोग घरेलू उपयोग के लिए इसे खरीद कर ले जा रहे हैं।


