आशीर्वाद स्कीम में 31.78 करोड़ जारी:पंजाब में अनुसूचित जाति की बेटियों की शादी के लिए मिलेंगे 51,000 रुपए

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने राज्य के जरूरतमंद परिवारों को बड़ी राहत देते हुए मौजूदा वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ‘आशीर्वाद स्कीम’ का बजट जारी कर दिया है। सरकार ने अनुसूचित जातियों (SC) से संबंधित 6231 लाभार्थियों के लिए 31.78 करोड़ रुपये की राशि को मंजूरी दी है। यह कदम गरीब परिवारों पर बेटियों की शादी के समय पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है। पारदर्शिता के साथ सीधे खातों में पहुंची मदद विधानसभा हलका तरनतारन के विधायक हरमीत सिंह संधू ने इस महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि पंजाब सरकार समाज के हर वर्ग को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए वचनबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस सहायता राशि का भुगतान डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में किया गया है। इस पारदर्शी प्रक्रिया ने बिचौलियों की भूमिका को खत्म कर दिया है और यह सुनिश्चित किया है कि पूरी राशि हकदार परिवारों तक बिना किसी देरी के पहुँचे। जिलों के अनुसार लाभार्थियों का विवरण आशीर्वाद पोर्टल पर प्राप्त आवेदनों के आधार पर राज्य के विभिन्न जिलों में राशि का वितरण किया गया है। मुख्य रूप से लुधियाना और फाजिल्का जिलों में सबसे अधिक लाभार्थियों को इसका लाभ मिला है: (इसके अलावा श्री फतेहगढ़ साहिब और जालंधर के लाभार्थियों को भी सहायता प्रदान की गई है) प्रति बेटी ₹51,000 की वित्तीय सहायता विधायक संधू ने बताया कि इस योजना के तहत कम आय वाले परिवारों की लड़कियों की शादी के लिए सरकार 51,000 रुपये की वित्तीय मदद देती है। आशीर्वाद स्कीम न केवल एक आर्थिक सहायता है, बल्कि यह उन परिवारों के लिए सम्मान की बात है जो वित्तीय तंगी के कारण बेटियों के विवाह को लेकर चिंतित रहते थे। एक परिवार की अधिकतम दो बेटियां इस कल्याणकारी योजना का लाभ ले सकती हैं। योजना का लाभ लेने के लिए अनिवार्य शर्तें सरकार ने योजना की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कुछ योग्यता शर्तें निर्धारित की हैं: समाज कल्याण की ओर बढ़ता कदम अंत में विधायक हरमीत सिंह संधू ने दोहराया कि मान सरकार का लक्ष्य सरकारी खजाने का पैसा सीधे आम जनता की भलाई में लगाना है। आशीर्वाद स्कीम के माध्यम से हजारों बेटियों के घर बसाने में सरकार का यह योगदान राज्य के सामाजिक विकास में मील का पत्थर साबित होगा।

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