भास्कर न्यूज | बालोद रविवार को सरदार वल्लभ भाई पटेल मैदान बालोद में छत्तीसगढ़ प्रदेश कुर्मी क्षत्रिय समाज का प्रथम जिला सम्मेलन आयोजित किया गया। इस अवसर पर विशेष अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधायक पाटन भूपेश बघेल ने कहा कि समाज के विकास और मजबूती के लिए सभी को एकजुट होना जरूरी है। उन्होंने आदर्श विवाह की प्रशंसा की और अपने कार्यकाल में विभिन्न समाज को दी गई सहायता राशि का उल्लेख करते हुए वर्तमान सरकार की आलोचना भी की। एक तरफ खर्चीली शादियां बढ़ रही है वहीं समाज में आदर्श विवाह के जो तैयार हुए हैं वह निश्चित रूप से बधाई के पात्र हैं। संबोधन में लता चंद्राकर ने महिलाओं की उपस्थिति को लेकर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि समाज में जागरूकता आई है। समाज के विकास में महिलाओं का योगदान हमेशा अग्रणी रहा है। सांसद दुर्ग विजय बघेल ने कहा कि कुर्मी समाज की लगातार बढ़ रही संख्या को देखते हुए जनगणना कराने का निर्णय लिया गया है। इसमें सभी लोगों को बढ़चढ़कर भाग लेना है। उन्होंने आह्वान किया कि समाज के पदाधिकारी समाज को आगे ले जाने में सतत चिंतन करें। समाज के सभी वर्गों को बराबर महत्व दें, समाज की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का लगातार प्रयास करें। प्रीतपाल बेलचंदन, गुरुदेव वीरेंद्र देशमुख, जांजगीर विधायक व्यास नारायण कश्यप ने भी संबोधित किया। कलश यात्रा में 2100 महिलाएं शामिल हुईं कलश यात्रा का शुभारंभ पाटेश्वर धाम के संत राम बालक दास महात्यागी ने शिवाजी की प्रतिमा की आरती उतारकर किया। कार्यक्रम के शुभारंभ में दिल्लीवार कुर्मी भवन बालोद से भव्य कलश यात्रा निकाली गई। इसमें लगभग 2100 महिलाएं शामिल रहीं। कलश यात्रा दिल्लीवार कुर्मी भवन बालोद से जय स्तंभ चौक, मधु चौक, सदर बाजार होते हुए कार्यक्रम स्थल सरदार वल्लभ भाई पटेल मैदान पहुंची। यात्रा में डीजे की धुन में समाज के लोग नाचते गाते चले। साथ ही शिवाजी महाराज की जयकारे भी लगे।। इस अवसर पर प्रतिभावान बच्चों का सम्मान किया गया। उपलब्धियों को सराहा। समारोह में पूर्व सीएम को बोलते समय टोका गया छत्तीसगढ़ कुर्मी क्षत्रिय समाज के प्रथम जिला सम्मेलन में जब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने धान खरीदी के मुद्दे पर सरकार की आलोचना शुरू की, तब आयोजकों में से ही किसी ने उन्हें टोकते हुए कहा कि यह राजनीतिक मंच नहीं, बल्कि सामाजिक मंच है, कृपया केवल समाज के मुद्दों पर बोलें। उन्होंने कहा कि वे समाज के हित की ही बात कर रहे हैं, क्योंकि धान खरीदी की समस्या का प्रभाव सीधे समाज के लोग महसूस कर रहे हैं।


