शुभ ने ठाना था वैज्ञानिक ही बनना है, कई नौकरी पाई, अंतत: इसरो पहुंचे

एक के बाद एक कई नौकरियां पाईं, पर वै​ज्ञानिक बनने का सपना पूरा किया इसरो की वैज्ञानिक और अभियंता (कंप्यूटर साइंस) परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक -9 प्राप्त किया। प्रबंध प्रशिक्षु रक्षा और सार्वजनिक क्षेत्र में ऑल इंडिया रैंक- 6 मिला। सहायक निदेशक, सॉफ्टवेयर प्रौद्योगिकी उद्यान पद के ​िलए हुई परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल किया। इन सभी विकल्पों के बावजूद उन्होंने अंततः विज्ञान और राष्ट्र सेवा को प्राथमिकता दी और इसरो में वैज्ञानिक के रूप में कार्य कर रहे हैं। उच्च सेवा में चयन होने के बावजूद वही सेवा चुनी जो बचपन में तय कर ली थी बचपन से ही जिन बच्चों की पहचान उनकी मेधा, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति स्पष्टता से हो जाती है, वे आगे चलकर केवल सफलता नहीं पाते, बल्कि मिसाल बन जाते हैं। शुभ मिश्रा ऐसे ही प्रतिभाशाली युवा हैं, जिन्होंने उच्च सेवाओं में चयन पाने के बाद देश की सेवा और विज्ञान को चुना। शुभ मिश्रा ने शिक्षा और कौशल के दम पर कई प्रतिष्ठित पदों और ग्रुप-ए सेवाओं में चयन प्राप्त किया, पर सब छोड़ वैज्ञानिक बने। युवाओं के लिए सीख सफलता का संदेश:शुभ मिश्रा की यात्रा यह संदेश देती है कि प्रतिभा, परिश्रम और राष्ट्र सेवा की भावना जब साथ होती है, तब सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं रहती, देश की धरोहर बन जाती है। आज शुभ मिश्रा केवल एक वैज्ञानिक नहीं हैं, बल्कि झारखंड और पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक हैं। जैसे बचपन में ही वैज्ञानिक बनने का सपना देखा और उसे पूरा करने के लिए आरामदायक विकल्पों को त्याग दिया, ऐसा ही दृढ़संकल्प देश के सभी युवाओं में होना चाहिए। कभी-कभी किसी व्यक्ति की कहानी केवल उसकी सफलता का विवरण नहीं होती, बल्कि वह पूरे समाज और आने वाली पीढ़ी के लिए दिशा तय करती है। रांची के शुभ मिश्रा की यात्रा भी ऐसी ही है। यह कहानी है एक ऐसे बालक की, जिसने बचपन से ही लक्ष्य को पहचान लिया था। उसने अवसरों की भीड़ में कभी अपने लक्ष्य को खोने नहीं दिया। एक के बाद एक कई उच्च सेवाओं में चयन हुआ। इन सबको छोड़ विज्ञान से जुड़ कर देश की सेवा करने का रास्ता चुना। इसरो के वैज्ञानिक बने।

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