छत्तीसगढ़ का दंतेवाड़ा देश का ऐसा पहला जिला है, जहां हर पंचायत में बच्चों की अपनी लाइब्रेरी है। दरअसल, 15 अगस्त 2024 को बाल मित्र पुस्तकालय की शुरुआत हुई। जिसके बाद बीते दो साल में दंतेवाड़ा की सभी ग्राम पंचायतों में 169 बाल मित्र लाइब्रेरी बन चुकी हैं। इन लाइब्रेरी को एक्टिविटी सेंटर के रूप में विकसित किया गया है। यही नहीं इस पहल को केवल किताबें पढ़ने तक सीमित नहीं रखा गया। इसके साथ गांवों को भी चाइल्ड फ्रेंडली बनाने पर फोकस किया गया। बाल मित्र लाइब्रेरी केवल पढ़ने की जगह नहीं है, बल्कि ये नक्सल समस्या से लंबे अर्से तक जूझे गांवों में बचपन को वापस बचाने की पहल भी साबित हुई। जो कि इसे पूरे देश में खास बनाती है। इतना ही नहीं, बाल मित्र लाइब्रेरी मॉडल को पीएम लोक प्रशासन उत्कृष्टता पुरस्कार के फाइनल तक जगह भी मिल चुकी है। नीति आयोग ने शिक्षा सम्मेलन में देश भर के राज्यों के सामने इसे प्रस्तुत किया गया। बिना नई इमारत, बड़ा बदलाव
इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता ये भी है कि बाल मित्र लाइब्रेरी के लिए किसी भी पंचायत में कोई भी नई इमारत नहीं बनाई गई। गांवों में पड़ी खाली या बेकार सरकारी इमारतों को दुरुस्त कर बच्चों को सौंप दिया गया। ग्राम पंचायतों ने खुद आगे बढ़कर इन इमारतों को लाइब्रेरी में बदला। बाल मित्र लाइब्रेरी से केवल बच्चों को ही नहीं उनके अभिभावकों को भी जोड़ा गया है। 169 बाल मित्र फैलो बच्चों को पढ़ाने के साथ माता पिता से भी संवाद करते हैं। लाइब्रेरी नहीं, बच्चों की अपनी दुनिया
पंचायतों में बनीं ये अनूठी लाइब्रेरी बच्चों की चहल-पहल से गुलजार रहती है। यहां किताबें ही नहीं पढ़ते हैं, बल्कि खेलते और चित्र भी बनाते हैं। बाल मित्र लाइब्रेरी को ऐसे एक्टिविटी सेंटर के रूप में विकसित किया गया जहां बच्चे खुलकर अपनी अभिव्यक्ति करते हैं। एक खासियत ये भी है कि इन लाइब्रेरी को बच्चे खुद ही चलाते हैं। कौनसी किताबें आएगी, किस तरह की गतिविधियां होंगी इसका फैसला बच्चे खुद करते हैं।


