नर्मदापुरम के पाहनवर्री में जर्मन तकनीक से बनेगी दीवार:तवा नदी की बाढ़ से बचाएगी; रेत से तैयार होगी पिचिंग, 100 साल रहेगी उम्र

नर्मदापुरम जिले के सोहागपुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पाहनवर्री को तवा नदी की बाढ़ से बचाने के लिए अब जर्मन टेक्नोलॉजी का सहारा लिया जाएगा। यहां तवा नदी की रेत का उपयोग करके ही एक मजबूत पिचिंग (दीवार) बनाई जाएगी, जिसकी उम्र 100 साल होगी। यह जानकारी सोहागपुर विधायक विजयपाल सिंह राजपूत ने सोमवार को आयोजित प्रेसवार्ता में दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। न जलेगी, न बहेगी; जर्मनी की टीम ने किया था सर्वे विधायक ने बताया कि जर्मन टेक्नोलॉजी से तैयार होने वाली यह पिचिंग इतनी मजबूत होगी कि यह न तो आग से जलेगी और न ही बाढ़ के पानी में बहेगी। कुछ साल पहले जर्मनी की एक टीम ने यहां का दौरा किया था। तब विधायक, जल संसाधन विभाग के तत्कालीन ईई वीके जैन और टीम ने निरीक्षण कर आधुनिक तकनीक से बाढ़ नियंत्रण की योजना बनाई थी। यह योजना विभाग में लंबित थी, जिसे अब मंजूरी मिल गई है। मरोड़ा-राजोन के बीच पुल, 40 किमी का फेरा बचेगा विधायक राजपूत ने तवा नदी पर मरोड़ा और राजोन गांव को जोड़ने के लिए एक नए पुल के निर्माण की भी जानकारी दी। इस पुल के बनने से ग्रामीणों को करीब 40 किलोमीटर का फेरा नहीं लगाना पड़ेगा, जिससे हजारों लोगों को फायदा होगा। हर साल बाढ़ से होता है भारी नुकसान पाहनवर्री गांव में हर साल तवा नदी की बाढ़ से काफी नुकसान होता है। बाढ़ के कारण रेत और खेत एक बराबर हो गए हैं, जिससे बारिश के दिनों में पानी आसानी से गांव में घुस जाता है। इसी समस्या के स्थायी समाधान के लिए यह आधुनिक दीवार बनाई जा रही है। प्रेसवार्ता में विधायक ने 16 जनवरी को मुख्यमंत्री द्वारा माखननगर में की गई अन्य घोषणाओं और उपलब्धियों की जानकारी भी दी।

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