एम्स भोपाल:कैंसर सर्जरी के बाद भी नहीं बिगड़ेगा चेहरा, बोलना-निगलना होगा आसान

भोपाल में हर एक लाख आबादी पर 41 लोग मुंह के कैंसर से जूझ रहे हैं। इनमें ज्यादातर मरीज ऐसे हैं, जिनकी सर्जरी के बाद बीमारी से ज्यादा बड़ी चुनौती होती है- दोबारा बोल पाना, खाना चबाना और सामान्य जिंदगी में लौटना। अब तक ऐसे जटिल मामलों में मरीजों को इलाज के लिए बड़े निजी अस्पतालों या दूसरे शहरों में जाना पड़ता था, जहां खर्च लाखों में पहुंच जाता था। अब यह मजबूरी खत्म होने जा रही है। एम्स भोपाल में हेड एंड नेक कैंसर के बाद होने वाली जटिल रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी की सुविधा शुरू होने जा रही है। एम्स भोपाल के बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. अभिनव सिंह इसे भोपाल में शुरू कर रहे हैं। उन्होंने जयपुर स्थित भगवान महावीर अस्पताल से हेड एंड नेक रिकंस्ट्रक्शन पर केंद्रित सुपर माइक्रोसर्जरी का प्रशिक्षण पूरा किया है। पांच चरण में होती है यह सर्जरी भोपाल में प्रति एक लाख आबादी में ओरल कैंसर के मरीजों में 30 से अधिक पुरुष और 11 महिलाएं शामिल हैं। पॉपुलेशन बेस्ड कैंसर रजिस्ट्री की रिपोर्ट के मुताबिक शहर में हर वर्ष कैंसर के लगभग 9 से 10 हजार नए मरीज सामने आ रहे हैं। काम की बात… एम्स भोपाल में यह सुविधा सरकारी दरों और आयुष्मान योजना के तहत उपलब्ध होगी। इससे मध्यप्रदेश के मरीजों को इलाज के लिए बाहर जाने की मजबूरी नहीं रहेगी।

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