टोंक जिले की नासिरदा ग्राम पंचायत मुख्यालय पर घुमंतु समुदाय के लोगों को पहचान पत्र जारी करने और उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से लगाया गया शिविर महज खानापूर्ति साबित हुआ। बिना किसी सार्वजनिक सूचना के लगाए गए इस शिविर में दिनभर गिने-चुने लोग ही पहुंचे। हालात यह रहे कि ग्रामीणों के साथ-साथ ग्राम पंचायत प्रशासक को भी शिविर की जानकारी तक नहीं दी गई। इस लापरवाही को लेकर प्रशासक किरण सांसी ने कड़ी नाराजगी जताते हुए जिला कलेक्टर से जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों को नहीं दी गई कोई सूचना प्रशासक किरण सांसी ने बताया कि शिविर की कोई भी सार्वजनिक सूचना न तो उन्हें दी गई और न ही ग्रामीणों को। पंचायत स्तर पर ना तो मुनादी करवाई गई, ना ही कोई सूचना चस्पा की गई और ना ही किसी अन्य माध्यम से लोगों को अवगत कराया गया। इस वजह से पात्र लोग शिविर तक नहीं पहुंच पाए और उन्हें सरकार की योजनाओं का लाभ नहीं मिल सका। शिविर में दिनभर नायब तहसीलदार, पटवारी समेत अन्य कर्मचारी बैठे रहे, लेकिन लाभार्थियों की संख्या बेहद कम रही। सरकार की मंशा पर फिरा पानी प्रशासक ने कहा कि इस तरह की लापरवाही से सरकार की मंशा पर पानी फिर गया। जिन घुमंतु समुदाय के लोगों को योजनाओं से जोड़ना था, वही शिविर से वंचित रह गए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उपखंड अधिकारी देवली से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। राजस्थान घुमंतु बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष ने भी जताई नाराजगी मामले में राजस्थान घुमंतु बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष गोपाल केसावत ने भी कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि शिविरों की जानकारी सार्वजनिक रूप से दी जानी चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। उन्होंने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सरकार से कार्रवाई की मांग की है। भविष्य में व्यापक प्रचार-प्रसार की मांग प्रशासक किरण सांसी ने कहा कि भविष्य में इस तरह के शिविरों के आयोजन से पहले ग्राम पंचायत को अनिवार्य रूप से सूचना दी जानी चाहिए। साथ ही मुनादी, पोस्टर, सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक पात्र लोग सरकारी योजनाओं से जुड़ सकें। इनपुट: महेंद्र धाकड़, नासिरदा


