भास्कर न्यूज|गुमला नगर निकाय चुनाव की सुगबुगाहट के साथ ही शहरी क्षेत्र में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। वार्डों के आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होते ही दावेदारों की लंबी लिस्ट सामने आने लगी है। इस बार के चुनाव में खास बात यह है कि पिछले चुनावों में सक्रिय रहे पुराने चेहरे एक बार फिर मैदान में उतरने की तैयारी कर चुके हैं। जिससे नए उम्मीदवारों के लिए चुनौती बढ़ गई है। शहर के लगभग हर वार्ड में पूर्व पार्षदों और पिछली बार चुनाव लड़ चुके दिग्गजों ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। ये पुराने चेहरे अनुभव के दम पर जनता के बीच पैठ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। मोहल्लों की चौपालों से लेकर चौक-चौराहों तक विकास कार्यों के दावों और वादों का दौर शुरू हो चुका है। पुराने दावेदारों का मानना है कि क्षेत्र की समस्याओं की बेहतर समझ और प्रशासन के साथ उनके पुराने तालमेल के कारण जनता उन पर फिर से भरोसा जताएगी। दूसरी ओर वार्डों में नए उम्मीदवारों की भी कमी नहीं है। वे बदलाव के नारे के साथ मैदान में उतरने को तैयार हैं। नए दावेदारों का तर्क है कि पुराने चेहरों ने लंबे समय तक पद में रहने के बावजूद वार्डों की बुनियादी समस्याओं जैसे जलभराव, खराब स्ट्रीट लाइट और टूटी सड़कों का स्थायी समाधान नहीं किया है। जिस कारण जनता भी बदलाव के मूड में है और इसका परिणाम होगा कि जनता नए चेहरों को अवसर प्रदान करेगी। फिलहाल दावेदारों की भारी भीड़ ने प्रमुख राजनीतिक दलों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। एक-एक वार्ड से टिकट के लिए कई दावेदार लाइन में हैं। सूत्रों के अनुसार पार्टियां इस बार जिताऊ उम्मीदवार के साथ-साथ साफ-सुथरी छवि वाले को प्राथमिकता देने पर विचार कर रही हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता पुराने अनुभवों को चुनती है या नए विजन को मौका देती है। गुमला नगर निकाय चुनाव के लिए राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। कांग्रेस खेमे में अध्यक्ष पद की दावेदारी को लेकर चल रही लंबी जद्दोजहद के बीच अब तस्वीर साफ होती नजर आ रही है। कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार के रूप में अब तक दो प्रमुख दावेदारों ने अपना आवेदन दाखिल किया है। सबसे बड़ा उलटफेर निवर्तमान अध्यक्ष दीपनारायण के रूप में सामने आया है। जिन्होंने आवेदन देने के बाद चुनाव लड़ने की रेस से खुद को पीछे खींच लिया है और साफ कर दिया है कि उनके परिवार की कोई महिला चुनावी मैदान में नहीं उतरेगी। जबकि दीपनारायण को इस चुनाव में एक मजबूत दावेदार माना जा रहा था। लेकिन उनके पीछे हटने के फैसले ने सबको चौंका दिया है। हालांकि दीपनारायण ने पत्नी या बहु को चुनाव नहीं लड़ाने के पीछे निजी कारणों का हवाला दिया है। लेकिन राजनीतिक गलियारे में इसे लेकर कई मतलब निकाले जा रहे है। वहीं जिन दो उम्मीदवारों ने आवेदन जमा किया है। उनमें कांग्रेस के प्रदेश सचिव रमेश कुमार चीनी की पत्नी हेमावती लकड़ा व निवर्तमान पार्षद सीता देवी शामिल है। इन्होंने जिलाध्यक्ष राजनील तिग्गा के समक्ष दावेदारी कर अपनी जीत का भरोसा जताया है।


