भास्कर न्यूज |लुधियाना शहर में इमिग्रेशन और आइल्स सेंटरों का कारोबार तेजी से सिमटता नजर आ रहा है। लगातार बढ़ रहे फ्रॉड मामलों और सरकारी सख्ती के चलते इस साल बड़ी संख्या में सेंटरों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में अब तक 467 इमिग्रेशन और आइल्स सेंटरों के लाइसेंस सस्पेंड या कैंसिल किए जा चुके हैं। यदि पूरे शहर में मौजूद करीब 2100 सेंटरों की संख्या के हिसाब से देखा जाए, तो यह आंकड़ा लगभग 22 प्रतिशत बैठता है, जो अपने आप में चिंताजनक है। जानकारी के मुताबिक, लुधियाना में इमिग्रेशन और आइल्स सेंटरों की सबसे ज्यादा संख्या मॉडल टाउन एरिया में है। बीते वर्ष 2024 में भी हालात बेहतर नहीं थे। उस दौरान 224 सेंटरों ने अपने लाइसेंस सरेंडर कर दिए थे। इस साल स्थिति और गंभीर हो गई है। कई सेंटरों पर कार्रवाई के बाद उनके संचालकों ने शटर गिरा दिए हैं और अब वे किसी अन्य कारोबार में हाथ आजमा रहे हैं। सेंटर बंद होने की एक बड़ी वजह युवाओं की विदेश जाने की घटती रुचि भी बताई जा रही है। विदेशों में रोजगार के अवसर कम होने और वहां बढ़ती परेशानियों के कारण अब कई युवा पंजाब में रहकर ही काम करना ज्यादा सुरक्षित और बेहतर विकल्प मानने लगे हैं। इससे इमिग्रेशन इंडस्ट्री की मांग में भी लगातार गिरावट आ रही है। मॉडल टाउन के आइल्स सेंटर के मालिक विकास कुमार का कहना है कि जो सेंटर नियमों के तहत सही तरीके से काम कर रहे हैं, उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन गली-मोहल्लों में बिना मानकों के चल रहे सेंटर, जिन पर बार-बार धोखाधड़ी के मुकदमे दर्ज हो रहे थे, वे अब सख्ती के चलते खुद ही अपने सेंटर बंद करने को मजबूर हो गए हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो सरकारी कार्रवाई, फ्रॉड केसों में बढ़ोतरी और युवाओं के बदले रुझान ने लुधियाना की इमिग्रेशन इंडस्ट्री को बड़ा झटका दिया है। आने वाले समय में यह आंकड़ा और बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।


