सीवरेज समस्या को लेकर पूर्व एक्सईएन (एक्सिक्यूटिव इंजीनियर) हाकम सिंह ने स्पष्ट किया कि जब तक मुख्य (मेन) सीवरेज लाइन की पूरी तरह से सफाई नहीं की जाती, तब तक इलाके की अंदरूनी सीवरेज लाइनों में गंदा पानी जमा होता रहेगा। उन्होंने कहा कि केवल ऊपरी तौर पर सफाई करने या बार-बार मशीनें लगाने से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। किसी भी क्षेत्र में यदि सीवरेज पाइपलाइन का साइज छोटा हो और आबादी या औद्योगिक गतिविधि ज्यादा हो, तो स्वाभाविक रूप से ओवरफ्लो की समस्या पैदा होती है। ऐसे मामलों में सबसे पहले तकनीकी सर्वे कर यह जांचना जरूरी है कि मौजूदा सीवरेज पाइपलाइन क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप है या नहीं। यदि पाइप का व्यास छोटा है, तो उसे बड़े साइज की सीवरेज लाइन से बदलना अनिवार्य है, ताकि पानी बिना रुकावट मुख्य सीवरेज लाइन तक पहुंच सके। जब गंदा पानी सही ढंग से बड़े सीवरेज नेटवर्क तक नहीं पहुंच पाता, तो वह सड़कों पर फैलने लगता है, जिससे न सिर्फ दुर्गंध और गंदगी बढ़ती है बल्कि संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है। इसका सीधा असर आम लोगों, मजदूरों और आसपास के उद्योगों पर पड़ता है। {कारोबारी सतनाम सिंह मक्कड़ ने बताया कि पिछले काफी समय से निगम इसी तरह दिखावटी कार्रवाई कर रहा है। कभी मशीनें लगाकर सफाई दिखा दी जाती है और कुछ ही घंटों में हालात फिर पहले जैसे हो जाते हैं। समस्या का स्थायी समाधान न होने पर पीड़ित परिवार के साथ नगर निगम दफ्तर जोन सी के बाहर धरना देंगे। {कारोबारी विशाल छाबड़ा ने कहा कि सीवरेज के गंदे पानी के कारण लेबर काम पर आने से कतरा रही है। जो मजदूर पहले से काम कर रहे हैं, वे भी धीरे-धीरे नौकरी छोड़कर जा रहे हैं। {रोबिन खुराना ने बताया कि दूसरे राज्यों से आने वाले कारोबारी जब इस रोड की हालत देखते हैं तो फैक्ट्री के अंदर तक आने से इनकार कर देते हैं। कई ग्राहकों ने पहले से बुक किया गया माल भी कैंसिल कर दिया है। {फैक्ट्री कर्मचारी कृष्ण कुमार ने बताया कि रोजाना फैक्ट्री आते-जाते समय उनके कपड़े पूरी तरह गंदे हो जाते हैं। सर्दी के मौसम में भी उन्हें दोबारा नहाना पड़ता है। शरीर से इतनी तेज बदबू आती है कि उन कपड़ों में ज्यादा देर तक रहना संभव नहीं होता। स्थानीय लोगों और कारोबारियों का कहना है कि अगर नगर निगम ने जल्द स्थायी समाधान नहीं किया, तो यह इलाका स्वास्थ्य संकट का केंद्र बन सकता है। भास्कर न्यूज | लुधियाना साउथ हलका में नगर निगम की लापरवाही एक बार फिर उजागर हो गई है। नगर निगम द्वारा सीवरेज की सफाई को लेकर की गई कथित कार्रवाई महज ड्रामेबाजी साबित हुई। सीवरेज का पानी साफ किए जाने के 24 घंटे भी पूरे नहीं हुए थे कि ढंडारी कलां इंडस्ट्रियल एरिया एक बार फिर गंदे और बदबूदार पानी में डूब गया। हालात इतने खराब हैं कि सड़कों पर चलना मुश्किल हो गया है और पूरा इलाका दुर्गंध से भरा हुआ है। हैरानी की बात यह है कि नगर निगम के पास या तो सीवरेज को सही ढंग से साफ करने की कोई ठोस योजना नहीं है या फिर जानबूझकर इस इलाके की अनदेखी की जा रही है। हाल ही में इसी गंदगी के कारण एक बच्चे को गंभीर संक्रमण हुआ, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बावजूद नगर निगम ने कोई स्थायी समाधान निकालने के बजाय सिर्फ खानापूर्ति तक खुद को सीमित रखा हुआ है। निगम के जेई अवनीत ने बताया कि टीम को भेजकर सफाई करवाई थी। बुधवार को फिर से टीम भेजकर हालात जांचे जाएंगे। मैन सीवर लाइन की सफाई का काम चल रहा है जिसमें अभी समय लगेगा। इसी के चलते समस्या आ रही है। इंडस्ट्रियल एरिया में 19 जनवरी को सीवर का पानी निकालती निगम की टीम 20 जनवरी को फिर भरा गंदा पानी।


