पुत्र को आरी से काटकर शेर को परोसा, तब टूटा अर्जुन का घमंड

भास्कर न्यूज | धमतरी आरंग महोत्सव के राज्य स्तरीय मंच पर दर्री स्वतंत्र बाल समाज नाट्य मंडली ने राजा मोरध्वज का भोजन नाट्य का मंचन किया। इस पौराणिक कथा में श्रीकृष्ण अर्जुन से भी बड़ा उनका एक और भक्त है। अर्जुन जब इस बात को स्वीकार नहीं करते, तो श्रीकृष्ण ब्राह्मण का भेष धरते हैं। अपने साथ अर्जुन और यमराज को शेर बनाकर राजा मोरध्वज के पास ले जाते हैं। ब्राह्मण (श्रीकृष्ण) कहते हैं कि उनका शेर भूखा है। राजा मोरध्वज और उनकी पत्नी ने बिना देर किए अपने पुत्र को आरी से दो टुकड़ों में बांटकर शेर को परोस दिया। रानी के आंखों में आंसू देखकर ब्राह्मण ने पूछा कि आंसू क्यों, तो रानी का जवाब था… पुत्र का दाहिना भाग तो स्वीकार हो गया लेकिन बायां भाग बचा रह गया। इसी बात का दुख है। ऐसी भक्ति देखकर अर्जुन का घमंड वहीं चूर हो गया। इसके बाद श्रीकृष्ण ने राजा-रानी को अपने विराट स्वरूप के दर्शन दिए और उनके पुत्र को भी पुनर्जीवित कर दिया। नाटक के जरिए त्याग, बलिदान, भक्ति और आस्था की उसी महान परंपरा का जीवंत चित्रण किया गया, जिसने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। केबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, सांसद बृजमोहन अग्रवाल समेत विधायक, निगम-मंडल अध्यक्षों ने इस नाटक की खूब सराहना की।

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