राजस्थान रोडवेज का नाम सुनते ही अक्सर जेहन में घाटे की तस्वीर उभरती है, लेकिन झुंझुनूं रोडवेज डिपो ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। झुंझुनूं डिपो साल 2025 के अंत में पूरे प्रदेश के लिए मिसाल बन गया है। कभी लाखों के घाटे में चलने वाला यह डिपो अब रिकॉर्ड तोड़ मुनाफे की राह पर है। दिसंबर 2025 का महीना झुंझुनूं रोडवेज के इतिहास रच दिया। इस एक महीने में डिपो ने अपने सभी खर्चे (डीजल, वेतन और रखरखाव) निकालने के बाद 73 लाख 61 हजार 15 रुपए का शुद्ध मुनाफा कमाया है। यह न केवल इस साल की, बल्कि डिपो के इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। एक साल में बदला किस्मत का पहिया अगर हम पिछले साल के आंकड़ों पर नजर डालें, तो झुंझुनूं रोडवेज की स्थिति बेहद चिंताजनक थी। नवंबर 2024: डिपो को करीब 18.44 लाख रुपए का घाटा हुआ था। दिसंबर 2024: यह घाटा बढ़कर लगभग 39.50 लाख रुपए तक पहुंच गया था। एक साल के भीतर, यानी दिसंबर 2025 तक, डिपो ने न केवल अपना घाटा कवर किया, बल्कि 73 लाख रुपए से ज्यादा की शुद्ध कमाई भी कर ली। सफलता के पीछे सख्त मॉनिटरिंग इस बड़े बदलाव का सबसे बड़ा श्रेय झुंझुनूं डिपो के चीफ मैनेजर गिरिराज स्वामी को दिया जा रहा है। उनके कार्यभार संभालते ही डिपो की कार्यशैली पूरी तरह बदल गई। स्वामी ने केवल दफ्तर में बैठकर आदेश नहीं दिए, बल्कि खुद जमीन पर उतरकर मोर्चा संभाला। सुबह 5 बजे से चेकिंग: चीफ मैनेजर खुद सुबह 5 बजे बस स्टैंड और रास्तों में बसों की चेकिंग के लिए पहुंच जाते हैं। देर रात तक निगरानी: चेकिंग का यह सिलसिला रात 10 बजे तक चलता है, जिससे कर्मचारियों में अनुशासन बना रहता है। बिना टिकट यात्रा पर लगाम: पहले ‘बिना टिकट’ सवारी बैठाना एक बड़ी समस्या थी। अब सख्त चेकिंग के कारण हर सवारी को टिकट देना अनिवार्य हो गया है। कड़ी कार्रवाई: लापरवाही बरतने वाले कंडक्टरों और ड्राइवरों पर वेतन कटौती और निलंबन जैसी कड़ी कार्रवाई की गई। यात्रियों का बढ़ा भरोसा जब व्यवस्थाएं सुधरीं और बसों का संचालन समय पर होने लगा, तो यात्रियों का झुकाव भी रोडवेज की तरफ बढ़ा। टिकट व्यवस्था में पारदर्शिता आने से लोगों को भी सहूलियत हुई। कई रूटों पर जहां निजी बसों का बोलबाला था, वहां अब यात्री रोडवेज को प्राथमिकता दे रहे हैं। कर्मचारियों में जागी जिम्मेदारी की भावना चीफ मैनेजर गिरिराज स्वामी ने बताया कि मैनेजमेंट की सख्ती के साथ-साथ कर्मचारियों को प्रोत्साहित भी किया गया। उन्हें समझाया गया कि यदि रोडवेज फायदे में रहेगी, तो उनका भविष्य भी सुरक्षित रहेगा। आज डिपो का हर कर्मचारी—चाहे वो ड्राइवर हो या कंडक्टर—पूरी ईमानदारी के साथ अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है।


