ब्यावर में सम्मेलन में 11जोड़ों ने थामा एक-दूसरे का हाथ:श्रीयादे माताजी जयंती पर वैदिक रीति-रिवाजों से संपन्न हुआ समारोह

ब्यावर में श्रीयादे माताजी जयंती के अवसर पर चतुर्थ निशुल्क सामूहिक विवाह सम्मेलन मंगलवार शाम को संपन्न हुआ। इस सम्मेलन में 11 जोड़ों का विवाह वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार कराया गया।
समारोह में कैबिनेट मंत्री अविनाश गहलोत, माटी कला बोर्ड अध्यक्ष प्रहलाद राय टांक, ब्यावर विधायक शंकर सिंह रावत, बाबरा सरपंच और जैतारण प्रधान ने भाग लिया। इन सभी अतिथियों ने नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया। प्रजापति समाज ब्यावर और अन्य क्षेत्रों के समाजबंधुओं ने भामाशाह के रूप में कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर सहयोग किया। एजीएफ फाउंडेशन के प्रभारी राजेंद्र सोनी ने सभी नवविवाहित जोड़ों को 7 आवश्यक उपहार सामग्री भेंट की। मंत्री अविनाश गहलोत ने भी सभी 11 जोड़ों को स्टॉल प्रदान कर आशीर्वाद दिया। भामाशाहों को किया सम्मानित
11,000 रुपए या उससे अधिक का सहयोग देने वाले भामाशाहों को प्रजापति समाज ब्यावर द्वारा दुपट्टा, साफा और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। उपहार या राशि के रूप में सहयोग देने वाले अन्य भामाशाहों को भी दुपट्टा और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। दूल्हा-दुल्हन की शोभायात्रा निकाली
विवाह सम्मेलन से पूर्व प्रातः तेजा चौक मंदिर से दूल्हा-दुल्हन की शोभायात्रा निकाली गई। यह शोभायात्रा चांग गेट, श्री श्रीयादेश्वर महादेव मंदिर (चमन चौराहा), तेलियान चौपड़ और मेवाड़ी गेट से होते हुए समारोह स्थल शिव बाड़ी पहुंची। यहां समाज के वरिष्ठजनों की उपस्थिति में तोरण की रस्म अदा की गई, जिसके बाद मंच पर वरमाला कार्यक्रम संपन्न हुआ।
पंडित जितेंद्र दाधिच और उनकी टीम ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ विवाह फेरे संपन्न कराए। इसके उपरांत नवविवाहित जोड़ों को विधिवत रूप से विदा किया गया। सैकड़ों लोग रहे मौजूद
इस अवसर पर जयंती अध्यक्ष राकेश जलाधरा, संरक्षक गोपाल पीटीआई, गोविंद किरोड़ीवाल, गोपाल कपूरपूरा, सत्यनारायण सैंगटिया, बजरंग धुवारिया, दौलत किरोड़ीवाल, श्याम ओस्तवाल, मोहनलाल ओस्तवाल, कन्हैयालाल रेणवाल, राधेश्याम (पूर्व पार्षद), रवि कुवाडिया, सोहनलाल, रामप्रसाद दुम्बीवाल, शिवनारायण कारगवाल, चांदमल सैंगटिया, माणक किरोड़ीवाल, मुन्नालाल कुवाडिया, धीरेंद्र धूमाणिया, रामलाल हलवाई, राजेश, शिवलाल बेरा, गोपाल मुरैला, ललित बाबरिया, मनमोहन मुरैला, विनोद रावरिया, राकेश बाबरिया, गोपाल दुम्बीवाल, हीरालाल मोरवाल, लादू ओस्तवाल, मदन मंडावरा, श्रवण प्रजापति, जयनारायण मिश्रेला और मुरली सैन सहित बड़ी संख्या में समाजबंधु मौजूद रहे।

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