गिरवाड़ी गांव के ग्रामीण अपनी आस्था और पर्यावरण को बचाने के लिए लामबंद हो गए हैं। अरावली की पहाड़ियों पर स्थित प्राचीन ‘भैरूजी महाराज की बणी’ (जंगल) पर संकट मंडरा रहा है। मामला खेतड़ी और सीकर के बीच डाली जा रही 1.33 लाख KV की पावर ग्रिड लाइन से जुड़ा है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली की लाइन निकालने के लिए कंपनी हजारों पेड़ों को काटने की तैयारी कर रही है, जिसका पूरा गांव विरोध कर रहा है। क्या है पूरा विवाद सीकर से खेतड़ी तक बिजली की हाई-टेंशन लाइन बिछाई जा रही है। इस लाइन का रास्ता गिरवाड़ी गांव की उस पहाड़ी से होकर गुजर रहा है जहां भैरूजी महाराज का प्राचीन मंदिर और घना जंगल है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस हिस्से से लाइन ले जाई जा रही है, वहां बहुत अधिक पेड़ हैं। यदि इस लाइन को थोड़ा सा (करीब 300 मीटर) दूसरी तरफ खिसका दिया जाए, तो हजारों पेड़ों को कटने से बचाया जा सकता है। कंपनी को बचाने हैं पैसे, हमें बचाने हैं पेड़ ग्रामीणों का तर्क है कि पहाड़ी के दक्षिणी दिशा में एक भी पेड़ नहीं है। अगर कंपनी वहां से लाइन ले जाए, तो पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होगा। लेकिन इसके लिए कंपनी को दो अतिरिक्त बिजली के खंभे (पोल) लगाने पड़ेंगे। ग्रामीणों का आरोप है कि पावर ग्रिड कंपनी अपना थोड़ा सा खर्च बचाने के लिए आस्था के केंद्र और हरे-भरे जंगल को खत्म करने पर तुली है। वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ भी गहरा रोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि वन विभाग के अधिकारियों ने मौके पर आकर जमीन की जांच नहीं की और दफ्तर में बैठकर ही कंपनी को पेड़ काटने की परमिशन (NOC) दे दी। लोगों का कहना है कि यह जंगल उनकी कई पीढ़ियों की मेहनत का फल है और वे यहाँ की सूखी लकड़ी उठाना भी पाप समझते हैं। आंदोलन की चेतावनी ग्रामीणों ने प्रशासन को साफ चेतावनी दी है कि वे अपनी आस्था के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन और कंपनी ने रूट नहीं बदला, तो वे पेड़ों से लिपट जाएंगे। ग्रामीणों के अनुसार, वे खुद बलिदान दे देंगे लेकिन पेड़ों पर कुल्हाड़ी नहीं चलने देंगे। कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पहले भी उपखंड अधिकारी (SDM) को इस संबंध में ज्ञापन सौंपा था, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। कार्रवाई न होने से गांव वालों में भारी नाराजगी है। विनोद कुमार, प्रभुदयाल, आशिव सिंह और अशोक वर्मा सहित अनेक ग्रामीणों ने एकजुट होकर कहा है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करेंगे।


