कीचड़-खेतों के बीच से शव यात्रा निकालने के लिए मजबूर:श्मशान के लिए रास्ता तक नहीं, ग्रामीण बोले-सरकार बदली, पंचायत बदली, मगर हालात नहीं सुधरे

अलवर जिले के गोविंदगढ़ की नवगठित बारोली पंचायत (पूर्व में न्याणा) के अलघाना गांव में श्मशान घाट जाने के लिए रास्ता तक नहीं है। मंगलवार सुबह गांव की बुजुर्ग महिला के निधन के बाद परिजन और ग्रामीणों को कीचड़ भरी गलियों और खेतों से होकर गुजरना पड़ा। ग्रामीण सुखदेव सिंह ने बताया-गांव की बुजुर्ग महिला जमुना कौर पत्नी गुरदयाल सिंह का मंगलवार को निधन हो गया था। जब उनके अंतिम संस्कार का समय आया, तो श्मशान घाट तक जाने के लिए कोई पक्का रास्ता नहीं था। कीचड़ भरे रास्ते और खेतों के बीच होकर जाने को मजबूर
मजबूरन शव यात्रा को कीचड़ से भरी गलियों और सरसों के खेतों के बीच से ले जाना पड़ा। सरसों की खड़ी फसल के बीच से अर्थी को कंधे पर उठाकर निकालना ग्रामीणों के लिए एक बड़ी चुनौती थी। ग्रामीण बोले-लंबे समय से हो रहे परेशान
सुखदेव सिंह ने बताया-गांव की गलियों की हालत बेहद खराब है, सड़कों पर कीचड़ जमा रहता है और श्मशान तक जाने का कोई स्थायी मार्ग नहीं है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण लंबे समय से रास्ते की मांग कर रहे हैं। सुखदेव सिंह के अनुसार, प्रशासन और सरकारें बदलीं, यहां तक कि गांव की पंचायत भी न्याणा से बदलकर बारोली हो गई, लेकिन अलघाना गांव के हालात में कोई सुधार नहीं आया है। इनका ये कहना
गांव अलघाना में सफाई ठेकेदार के द्वारा कार्य बंद किया हुआ है, जिसे नोटिस जारी किया गया है। जल्द ही वह सफाई प्रारंभ की जाएगी।
लक्ष्मी सैनी, ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत बारोली गांव के श्मशान घाट के लिए स्थायी मार्ग नहीं है। जिससे कि लोगों को समस्या आ रही है। पहले प्रस्ताव बना कर भेजा भी गया था। मगर आपसी रजामंदी नहीं होने के कारण मार्ग नहीं खुल पाया।
रविंद्र तुंगर, हल्का पटवारी

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *