सिटी रिपोर्टर | बिलासपुर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पदस्थ लिपिक सुनील यादव के विरुद्ध भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े की शिकायतें सामने आई हैं। केंद्रीय मंत्री तोखन साहू से की गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यादव ने लाखों रुपए लेकर फर्जी अनुकंपा नियुक्ति, नियम विरुद्ध पदोन्नति और अवैध अटैचमेंट कराए हैं। मंत्री के निर्देश पर कलेक्टर ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। डीईओ ने दो विकासखंड शिक्षा अधिकारियों की जांच टीम गठित की है। शिकायत के अनुसार वर्ष 2022 से स्थापना-4 खंड में पदस्थ सुनील यादव ने नियमों को ताक पर रखकर नियुक्तियां करवाईं। मुख्य आरोप सौमिया जोहोआस की नियुक्ति को लेकर है। नियमों के अनुसार यदि माता-पिता दोनों शासकीय सेवा में हों तो आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति की पात्रता नहीं होती। पूर्व में विभाग ने इस आवेदन को अमान्य कर दिया था, लेकिन आरोप है कि सुनील यादव ने 10-15 लाख रुपए लेकर शासन को गुमराह किया और फर्जी तरीके से सक्ती जिले में सौमिया को सहायक ग्रेड-3 के पद पर नियुक्ति दिलवाई। इसी प्रकार, उनकी दूसरी बहन को भी स्वास्थ्य विभाग में नियुक्ति दिलाने का आरोप है। सुनील यादव पर शिक्षकों और भृत्यों से प्रति माह 2 से 10 हजार रुपए की अवैध वसूली करने और मनचाहे अटैचमेंट करने के भी आरोप हैं। गौर करने वाली बात यह है कि लोक शिक्षण संचालनालय रायपुर द्वारा पूर्व में की गई जांच में सुनील यादव को दोषी पाया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ^ मामले की गंभीरता को देखते हुए दो बीईओ के नेतृत्व में जांच टीम गठित की गई है। फिलहाल सुनील यादव को स्थापना खंड से हटा दिया गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। – विजय टांडे, डीईओ, बिलासपुर एक अन्य मामला शिवचरण यादव और उसकी पत्नी कमला यादव का है। यहां भी पति भुवन यादव और पत्नी जानकी यादव के शासकीय सेवा में होने के बावजूद फर्जी शपथ पत्र के आधार पर नियुक्तियां कराई गईं। इसके अलावा लिपिक पर अधिकारियों से मिलीभगत कर 10 लाख रुपए लेकर एक अन्य मामले में दूसरी पत्नी के बेटे को अनुकंपा नियुक्ति दिलाने का भी आरोप है।


