मुख्य परीक्षा का रिजल्ट रद्द करने संबंधी याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई
झारखंड हाईकोर्ट में बुधवार को जेपीएससी 11 वीं से 13 वीं सिविल सेवा की मुख्य परीक्षा के रिजल्ट को निरस्त करने को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद सभी सफल 342 अभ्यर्थियों को दो सप्ताह में प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया। यह याचिका प्रार्थी अयूब तिर्की एवं अन्य ने दाखिल की है। प्रार्थी की ओर से अदालत को बताया गया कि जेपीएससी के नियम के मुताबिक दस वर्ष और पांच वर्ष के अनुभवी शिक्षक ही कॉपी का मूल्यांकन करेंगे। लेकिन आयोग ने अपने ही बनाए नियमों की अनदेखी की है। मुख्य परीक्षा की उत्तरपुस्तिका का मूल्यांकन महज एक-डेढ़ साल से शैक्षणिक कार्य कर रहे गेस्ट फैकल्टी से करा दिया। यह गलत है। इसलिए मुख्य परीक्षा का रिजल्ट रद कर फिर से कॉपी का मूल्यांकन कराकर रिजल्ट जारी किया जाए। जेपीएससी की ओर से बताया गया कि प्रार्थी का आरोप पूरी तरह बेबुनियाद है। नियम सबके लिए बराबर है। प्रार्थी असफल हुए हैं, इसलिए नियम को चुनौती दे रहे हैं। उन्हें पहले ही नियम को चुनौती देना चाहिए था। प्रार्थी की याचिका एकल पीठ ने खारिज कर दी है। इसलिए इस अपील याचिका को भी खारिज किया जाना चाहिए। सुनवाई के बाद अदालत ने प्रार्थी को सभी सफल अभ्यर्थियों को दो सप्ताह में प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता शुभाशीष रसिक सोरेन, कुमार हर्ष और मृणालिनी टेटे ने पक्ष रखा। एकल पीठ से खारिज हो चुकी है याचिकाहाईकोर्ट की एकलपीठ ने अक्टूबर 2025 में 11 वीं से 13 वीं संयुक्त जेपीएससी मुख्य परीक्षा के परिणाम को रद करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया था। अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद कहा था कि याचिकाकर्ता की आपत्तियां समयबद्ध नहीं थी। इसके खिलाफ प्रार्थी ने हाईकोर्ट की खंडपीठ में याचिका दाखिल की है।


