आंचल चड्ढा | जालंधर बसंत के पावन पर्व पर जालंधर शहर के उन मंदिरों में, जहां खाटू श्याम जी अपने स्व-रूप में विराजमान हैं, विशेष धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। इस अवसर पर खाटू श्याम जी के पीले फूलों से विशेष शृंगार किया जाता है और उन्हें बसंती पीले रंग का अंगवस्त्र धारण कराया जाता है। यह अंगवस्त्र केवल बसंत पर्व के दिन बदला जाता है। बसंत के दिन धारण कराया गया यह वस्त्र अगले बसंत पर्व तक खाटू श्याम जी धारण करते हैं। इसके बाद बदले गए पुराने ‘बागा’ को प्रसाद स्वरूप मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है। इस अंगवस्त्र को पीतांबरी या बागा और रक्षा सूत्र कहा जाता है। जबकि इसके ऊपर का चौला और शृंगार नियमित रूप से होता रहता है। यह परंपरा जालंधर के खाटू श्याम मंदिरों में धार्मिक रीति है, जो यहां की आस्था और परंपरा से जुड़ी हुई है। यह परंपरा तीनों मंदिरों में बीते कई समय से चल रही है। मान्यता है कि इस अंगवस्त्र को रखने से सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।


