राज्य को करीब तीन साल पहले ही ब्रेनडेड(कैडेवर)मरीजों के अंगों के दान की अनुमति मिली और किडनी व लीवर के मरीजों की अर्जियों की लाइन लग गई। पिछले तीन साल में 200 से अधिक किडनी व लीवर पीड़ित मरीजों के आवेदन अंगदान करवाने वाली संस्था स्टेट टिशू एंड आर्गन ट्रांसप्लांट संगठन (सोटो) में जमा हो गए। लेकिन अब तक केवल 12 ब्रेनडेड मरीजों के अंगदान किए गए हैं। इस तरह किडनी के चौबीस और लीवर के बारह मरीजों का ही ट्रांसप्लांट किया गया है। जबकि 193 मरीजों के आवेदन अभी पेंडिंग हैं। हैरानी की बात है कि राज्य में अंगदान बढ़ने की बजाय कम हो गए हैं। पिछले साल केवल दो ब्रेनडेड मरीजों के अंग दान में मिले हैं। जबकि 2022 में जब राज्य शासन ने कैडेवर ट्रांसप्लांट की मंजूरी दी तब उस वर्ष 2 ब्रेनडेड मरीजों के अंगदान में मिले थे। 2023 में 4 और 2025 में भी 4 मरीजों के अंगदान में मिले। पिछले वर्ष 2025 में संख्या घटकर 2 हो गई। इनमें एक डाक्टर और एक नीट के छात्र के परिजनों ने ब्रेनडेड के बाद अंगदान किया था। पड़ताल में पता चला है कि अभी तक राज्य में अंगदान को बढ़ावा देने के लिए किसी तरह की विशेष मुहिम भी नहीं चलायी जा रही है। विश्व और राष्ट्रीय अंगदान दिवस पर कार्यशाला या प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की खानापूर्ति ही की जा रही है। इसके अलावा किसी तरह का अतिरिक्त प्रयास नहीं किया जा रहा है। सोटो संचालित हो रहा डीकेएस से और यही आर्गन ट्रांसप्लांट के लिए पंजीकृत नहीं राज्य के लगभग 33 अस्पताल सोटो में पंजीकृत है यानी यहां ब्रेनडेड मरीजों का आर्गन ट्रांसप्लांट किया जा सकता है। इनमें केवल एम्स ही इकलौता सरकारी अस्पताल है। बाकी सभी प्राइवेट अस्पताल सोटो से पंजीकृत है। सोटो का संचालन डीकेएस सरकारी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल से किया जा रहा है और यही सोटो में पंजीकृत नहीं है। जबकि यहां आर्गन ट्रांसप्लांट के लिए ऑपरेशन थियेटर और सर्जरी करने वाले डाक्टर हैं। केवल ट्रांसप्लांट के लिए पर्याप्त उपकरण नहीं है, इस वजह से ये बड़ी सुविधा यहां शुरू नहीं की जा रही है। सोटो संचालक का पद रिक्त
राज्य में सोटो संचालक का पद करीब दो माह से खाली है। सोटो संचालक डॉ. विनीत जैन को अचानक दिल का दौरा पड़ा और वे चल बसे। उसके बाद से संचालक की जिम्मेदारी किसी अफसर को नहीं सौंपी गई है। इस वजह से भी सोटो की गतिविधियां लगभग ठप है। केवल औपचारिक काम काज ही किए जा रहे हैं। 6 राज्यों में विशेष योजना
तामिलनाडू व कर्नाटक ही नहीं गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और गोवा में लोगों को जागरुक करने के लिए अलग-अलग स्कीम चल रही है। उनमें अंगदान करने वालों को मृत्युपरांत राजकीय सम्मान से सम्मानित करने के अलावा उनके परिजनों को सरकारी स्कीम के तहत विभिन्न तरह की सहायता भी दी जा रही है।


