संभाग के सबसे बड़े आरबीएम अस्पताल जब से मेडिकल कॉलेज बना है तब से प्रदेश स्तरीय चिकित्सा सुविधाओं से जुड़ गया है, लेकिन अस्पताल का विस्तार जमीन के अभाव में अटका हुआ है। इससे कॉटेज वार्ड, कैंसर यूनिट से लेकर स्पाइन सर्जरी सेंटर और पैरामेडिकल कॉलेज जैसी कई योजनाएं अधर में हैं। वजह ये है कि भरतपुर विकास प्राधिकरण की स्कीम नंबर 10 में 14 जून 2021 को 25 हजार वर्गमीटर भूमि साढ़े चार साल पूर्व रिजर्व होने के बावजूद अभी तक आवंटन नहीं हुई है। विडंबना है कि अस्पताल प्रशासन ने 50 हजार वर्गमीटर भूमि की जरूरत बताते हुए नया प्रस्ताव भेजा, उसका निर्णय तो हुआ नहीं और पूर्व में रिजर्व 25 हजार वर्गमीटर जमीन भी आजतक आवंटित नहीं हुई है। जिससे इसका विस्तार अटक गया है, अस्पताल के विस्तार न होने से मरीजों को समय पर सभी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। हैरानी की बात यह है कि क्षेत्रीय विधायक डॉ. सुभाष गर्ग से लेकर शहर के जनप्रतिनिधि और आम लोग भी कई बार अस्पताल विस्तार की मांग उठा चुके हैं, इसके बावजूद निर्णय फाइलों से बाहर नहीं निकल पा रहा। “स्कीम नंबर 10 में पहली प्राथमिकता जिन लोगों की जमीन अवाप्त की गई है, उनको आवंटन की है। जहां तक आरबीएम अस्पताल के लिए रिजर्व की गई भूमि की बात है, वह जमीन अभी भी फैसिलिटी के लिए ही रिजर्व है, उसका निर्णय राज्य सरकार के निर्देशानुसार ही होगा।” -कनिष्क कटारिया, आयुक्त, बीडीए भरतपुर बीडीए ने बनाया कॉमर्शियल 456 प्लाट का प्लान बीडीए ने कॉमर्शियल 456 प्लाट का प्लान बनाया है। इसके लिए सड़क डाल दी गई हैं और प्लाट के साइज भी निर्धारित कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि बीडीए को अस्पताल को जमीन देने से कुछ भी राजस्व नहीं मिलता, उसने कॉमर्शियल प्लाट बेचकर अरबों रुपए की कमाई का जरिया ढूंढ लिया है। ऐसे में अस्पताल के लिए चिह्नित जमीन पर न तो कोई बीडीए का अधिकारी निर्णय कर पा रहा है और न ही अस्पताल प्रशासन प्रयास कर रहा है। जमीन नहीं मिली तो ये सुविधाएं आरबीएम को नहीं मिल पाएंगी


