जोड़बीड़ गिद्ध संरक्षित क्षेत्र में पहली बार विदेशी पक्षियों की गणना ट्रांजैक्ट मेथड से की जाएगी। इससे उनकी वास्तविक संख्या के करीब पहुंचा जा सकेगा। गणना गुरुवार और शुक्रवार दो दिन होगी। वन विभाग, बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस) और डूंगर कॉलेज के प्राणीशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में जोड़बीड़ संरक्षण रिजर्व में दो दिवसीय गिद्ध एवं रैप्टर (शिकारी पक्षी) गणना गुरुवार सुबह शुरू होगी। इससे थार मरुस्थलीय क्षेत्र में गिद्धों व अन्य शिकारी पक्षियों की स्थिति, संख्या और संरक्षण आवश्यकताओं के आकलन किया जा सकेगा। इस सर्वेक्षण में देश के विभिन्न हिस्सों से आए पक्षी विशेषज्ञ, शोधकर्ता, वन्यजीव अधिकारी तथा डूंगर कॉलेज के विद्यार्थी भाग ले रहे हैं। गणना के दौरान जोड़बीड़ क्षेत्र में पाए जाने वाले लॉन्ग बिल्ड गिद्ध, यूरेशियन ग्रिफ़ॉन, हिमालयन ग्रिफोन, मिस्री गिद्ध सहित विभिन्न रैप्टर प्रजातियों की पहचान और संख्या दर्ज की जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार जोड़बीड़ संरक्षण रिजर्व गिद्धों के लिए देश के प्रमुख स्थलों में से एक है। आयोजकों ने बताया कि सर्वेक्षण के निष्कर्ष राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर पक्षी संरक्षण नीतियों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे। साथ ही, युवाओं में पक्षी संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी यह एक महत्वपूर्ण प्रयास है। जोड़बीड़ को छह भागों में बांटा, मार्च तक होगी गणना विदेशी पक्षियों की गणना करने के लिए जोड़बीड़ गिद्ध संरक्षित क्षेत्र को छह भागों में बांटा गया है। इसके लिए तीन दल बनाए गए हैं। यह दल अलग-अलग लोकेशन पर ट्रांजैक्ट लाइन पर चलकर पक्षियों की गणना करेंगे। डीएफओ वाइल्ड लाइफ ने बताया कि यह गणना जनवरी, फरवरी और मार्च तक हर माह दो-दो दिन के लिए होगी। जोड़बीड़ में आने वाले विदेशी पक्षियों की संख्या का अब तक अनुमान ही लगाया जाता रहा है। अब लगभग वास्तविक संख्या पता चल सकेगी।


