भारतीय सेना के शौर्य इतिहास में जनरल सगत सिंह का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित है, जिन्होंने अपने अदम्य साहस से गोवा को पुर्तगालियों से मुक्त कराया और 1971 के युद्ध में पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया। लेकिन उसी युद्ध में एक और सगत सिंह थे, जिनकी वीरता अब तक सीमित दायरे में ही जानी जाती रही। यह वीर सपूत थे शेरगढ़ क्षेत्र के बेलवा गांव निवासी सगत सिंह इंदा, जिन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म इक्कीस में सगत सिंह की वीरता को दिखाया गया। जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण सिनेमाघर पहुंचे। इस दौरान शहीदों के परिजनों का सम्मान भी किया गया। बता दें कि सगत सिंह इंदा भारतीय सेना की प्रतिष्ठित पूना हॉर्स रेजिमेंट में टैंक प्रशिक्षक के रूप में तैनात थे और रेजिमेंट की रीढ़ माने जाते थे। 1971 के भारत–पाक युद्ध में उन्होंने परमवीर चक्र विजेता सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर युद्ध लड़ा। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘इक्कीस’ में पहली बार दोनों वीरों की यह ऐतिहासिक भूमिका बड़े पर्दे पर दिखाई गई है। 1971 युद्ध से पहले अरुण खेत्रपाल भारतीय सेना में शामिल हुए थे। उन्हें पूना हॉर्स रेजिमेंट में नियुक्ति मिली, जहां सगत सिंह इंदा टैंक ऑपरेटर और प्रशिक्षक के रूप में कार्यरत थे। नए रंगरूटों को युद्ध के लिए तैयार करने की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी। अरुण खेत्रपाल ने सगत सिंह के मार्गदर्शन में ही टैंक संचालन और युद्ध कौशल सीखा। बाद में जब बसंतर की ऐतिहासिक लड़ाई हुई, तब दोनों एक ही मोर्चे पर थे। सगत सिंह ट्रूप लीडर थे और उन्होंने दुश्मन के भारी टैंकों का डटकर मुकाबला किया। युद्ध के दौरान दोनों वीरों ने अद्वितीय साहस दिखाया और अंततः देश के लिए वीरगति को प्राप्त हुए। अरुण खेत्रपाल को उनकी असाधारण वीरता के लिए मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया, जबकि सगत सिंह इंदा को वीरता पदक प्रदान किया गया। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘इक्कीस’ में सगत सिंह इंदा और अरुण खेत्रपाल की वीरता को सजीव रूप में दर्शाया गया है। फिल्म में सगत सिंह की भूमिका अभिनेता सिकंदर खेर ने निभाई है, जो पूरी फिल्म में खेत्रपाल के साथ युद्धभूमि में नजर आते हैं। फिल्म में नाम बदलने की मांग परिजनों ने बताया कि फिल्म में पहली बार सगत सिंह इंदा की भूमिका को प्रमुखता से दिखाया गया है। हमने फिल्म निर्माताओं को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि उनके नाम को सगत सिंह राठौड़ की जगह सही रूप से सगत सिंह इंदा दर्शाया जाए, ताकि माटी के सपूत की सही पहचान सामने आ सकें।


