भास्कर न्यूज | गुमला सिसई प्रखंड स्थित नागफेनी की कोयल नदी इन दिनों बालू माफियाओं का अड्डा बना गया है। नियमों को ताक पर रखकर कोयल नदी से अवैध तरीके से बालू का उठाव जारी है। इस खेल में माफिया मालामाल हो रहे हैं। लेकिन पर्यावरण और सरकारी राजस्व को भारी क्षति पहुंच रही है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि बालू का यह अवैध कारोबार बिना प्रशासनिक संरक्षण के संभव नहीं है। दिन-दहाड़े दर्जनों ट्रैक्टर से नदी से बालू निकाले जा रहे हैं। माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें विभागीय कार्रवाई का कोई डर नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई भी नहीं हुई है। ग्रामीणों की शिकायत पर जब मामले की पड़ताल की गई, तो पाया गया कि सुपाली के रास्ते में तीन-चार स्थानों पर बालू जमा कर रखा गया है। लेकिन बालू की सबसे बड़ी खेप सुपाली प्राइमरी स्कूल के पीछे पाई गई। यहां करीब 50 ट्रैक्टर बालू अवैध तरीके से रखा गया था। बता दें कि यहां से डंप बालू को हाइवा के माध्यम से रांची भेजा जाता है। वहां करीब 35 हजार रुपए प्रति ट्रैक्टर के हिसाब से बालू बेचा जाता है। प्रत्येक दिन करीब 4 हाइवा बालू को अवैध तरीके से रांची में खपाया जा रहा है। इस हिसाब से देखा जाए, तो एक महीने में सरकार को करीब 42 लाख रुपए का राजस्व नुकसान हो रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि दिन-रात बालू उठाव के कारण पक्की सड़क की स्थिति भी जर्जर होती जा रही है। माफिया खुलेआम बालू उठाव कर रहे हैं। लेकिन डर से कोई विरोध नहीं कर पा रहा है। तस्करी का यह खेल बेहद संगठित तरीके से चल रहा है। इधर, पूछताछ करने पर जानकारी मिली कि स्थानीय माफिया ही खुलेआम अवैध तरीके से बालू की तस्करी करते हैं। सुपाली में स्कूल है। इसके बावजूद दिन भर ट्रैक्टर की आवाजाही लगी रहती है। इससे बच्चों की पढ़ाई बाधित होती है। साथ ही एमडीएम के समय भी बालू गाड़ी के आने-जाने से बालू के कण बच्चों के भोजन पर पड़ते हैं। लेकिन इसकी परवाह किए बगैर तस्कर बेरोक टोक बालू का कारोबार कर रहे है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सुपाली में बने अवैध डंपिंग यार्ड पर छापेमारी की जाए और कोयल नदी को माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराया जाए, ताकि बालू के अवैध कारोबार पर रोक लग सकें। कहा कि बालू के अवैध कारोबार के कारण ही क्षेत्र में 24 घंटे तीव्र गति से वाहन चलते हैं। इससे हमेशा ही दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों ने कहा -एमडीएम में मिल रहे बालू के कण


