बच्चों को पशु कल्याण संबंधी सामग्री पढ़ाने के दिए निर्देश, 13 फरवरी तक पशु कल्याण जागरूकता माह

भास्कर संवाददाता | श्रीगंगानगर स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षकों पर सिर्फ विद्यार्थियों को पढ़ाने और अनुशासन सिखाने के साथ अब एक और नई जिम्मेदारी सौंपी है। विभाग के नए आदेश में पशु प्रेम जाहिर किया है। इसके तहत एक महीने तक स्कूलों में बच्चों को पशु कल्याण संबंधी सामग्री पढ़ाने के लिए कहा गया है। जिला शिक्षा अधिकारी (गुणवत्ता एवं नवाचार) डॉ. रामगोपाल शर्मा ने प्रदेश के सभी संयुक्त निदेशक (स्कूल शिक्षा) को पत्र भेजकर पशु कल्याण के लिए आयोजन के निर्देश दिए हैं। इस माह का उद्देश्य आधुनिक पशुपालन के तरीकों के बारे में जागरूकता उत्पन्न करना, आधुनिक पशुपालन गतिविधियों में सुधार एवं पशुधन के कल्याण को बढ़ावा देना है। ज्ञात रहे कि कुछ ही दिनों पूर्व विभाग की ओर से आदेश जारी किए थे, जिसमें शिक्षकों को विद्यालय से कुत्तों को भगाने की जिम्मेदारी दी गई थी। विद्यार्थियों को प्रार्थना सभा तथा अन्य गतिविधियों में पशु प्रेम और संवेदनशीलता अपनाने के लिए मुख्य प्रशासनिक भवन विभाग ने पशुपालन विभाग के साथ मिलकर पशु कल्याण जागरूकता माह के आयोजन का निर्णय किया है। यह गतिविधि 13 फरवरी तक चलेगी। हालांकि बोर्ड परीक्षाएं नजदीक होने के चलते इन दिनों शिक्षकों पर पाठ्यक्रम पूरा करने का दबाव है। आदेश में विद्यार्थियों को पशुपालन विशेषज्ञों की इंटरैक्टिव क्लासरूम भी विजिट करानी होगी। यह गतिविधियां की प्रस्तावित: पशु कल्याण और पशुपालन विषयों पर फोटोग्राफी प्रतियोगिता, निबंध लेखन, वाद-विवाद प्रतियोगिता, नाटक मंचन और कला प्रतियोगिता। ^ इस समय स्कूलों में शिक्षकों के पास चार महत्वपूर्ण काम है। जिसमें पाठ्यक्रम पूरा कराना, प्रायोगिक परीक्षाएं लेना, एसआईआर का काम और वार्षिक परीक्षाओं के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराना है। शिक्षा विभाग को शिक्षकों को अध्यापन कार्यों के अलावा गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखना चाहिए, जिससे सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे मेधावी विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं हों। शिक्षा विभाग नित नए कार्यों का बोझ शिक्षकों पर लाद रहे हैं। – मोहर सिंह सलावद, प्रदेशाध्यक्ष, शिक्षक संघ रेसटा

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