सरना कोड हमारी पहचान है, इसके लिए करेंगे जोरदार आंदोलन : मंत्री

भास्कर न्यूज| डुमरी प्रखंड के अकासी के काकडोलता (सिरा सीता नाला) में बसंत पंचमी के पावन अवसर पर सरना आध्यात्मिक महासंगम सह राजकीय समारोह का भव्य आयोजन किया गया। यह समारोह पूरी तरह आध्यात्मिक, आस्था और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ, जिसमें हजारों की संख्या में सरना धर्मावलंबियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री चमरा लिंडा, सिसई विधायक जिग्गा सुसारन होरो और खूंटी विधायक राम सूर्य मुंडा उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत बैगा गहजु मुंडा, पेचा मुंडा और बुधना मुंडा द्वारा काकडोलता में विधिवत पूजा-अर्चना के साथ की गई। पूजा के उपरांत मुख्य अतिथियों द्वारा मंच पर दीप प्रज्वलन किया गया। मौके पर मंत्री चमरा लिंडा ने अपने संबोधन की शुरुआत मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को धन्यवाद देते हुए की। उन्होंने कहा कि सरकार ने काकडोलता जैसे धार्मिक स्थलों को मान्यता देकर ऐतिहासिक कदम उठाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरना धर्म की पहचान स्थापित करने के लिए सरना कोड आवश्यक है। 2027 में होने वाली जनगणना से पहले यदि सरना कोड नहीं दिया गया, तो आंदोलन किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि आदिवासी समाज की कोई लिखित धार्मिक पोथी नहीं है, बल्कि काकडोलता ही आदिवासी सृष्टि स्थल है। इस दौरान उपायुक्त ने उपस्थित जनसमूह का स्वागत किया। खूंटी विधायक राम सूर्य मुंडा ने कहा कि काकडोलता आदिवासियों का एक प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल है, जहां कई जिलों और राज्यों से श्रद्धालु आते हैं। उन्होंने कहा जे नाची से बाची अर्थात नाच-गान और संस्कृति से ही समाज जीवित रहता है। पूर्वजों की देन को न भूलें : जिग्गा सिसई विधायक जिग्गा सुसारन होरो ने कहा कि माघ महीने में की जाने वाली पूजा समाज के कल्याण के लिए होती है। उन्होंने कहा कि हमारे समाज की सबसे बड़ी शक्ति हमारा धर्म है। उन्होंने पूर्वजों की परंपराओं, गीत-संगीत, प्राकृतिक जीवनशैली और पहनाने की चर्चा करते हुए कहा कि यह सब हमारे पुरखों की अमूल्य देन है, जिसे हम भुला नहीं सकते। धार्मिक महत्व: यह आदिवासियों का एक पवित्र स्थल है, जहां वे मानते हैं कि प्रलय के बाद मानव की उत्पत्ति हुई थी, इसलिए इसे सृष्टि स्थल कहा जाता है। पवित्र जल: यहां के नाले के जल को बहुत पवित्र माना जाता है, जिसे लोग गंगाजल के समान मानते हैं। स्थान : यह गुमला जिले के डुमरी प्रखंड में स्थित है, जो रांची से लगभग 175 किमी दूर है।

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