सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच की दूरी का खामियाजा एक बार फिर झुंझुनूं जिले की बेटियों को भुगतना पड़ रहा है। जिले की सरकारी स्कूलों में 9वीं कक्षा में पढ़ने वाली 5515 छात्राओं का साइकिल मिलने का इंतजार खत्म नहीं हो रहा है। शिक्षा सत्र 2025-26 अपने अंतिम पड़ाव पर है, वार्षिक परीक्षाओं की सुगबुगाहट शुरू हो गई है, लेकिन विभाग अब तक साइकिलों का पहिया नहीं घुमा सका है। जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) राजेश मील ने बताया कि जिले की 5515 छात्राओं की ब्लॉकवार सूची माध्यमिक शिक्षा निदेशक को भेजी जा चुकी है। टेंडर प्रक्रिया के कारण राज्य स्तर से ही आपूर्ति में देरी हुई है। जल्द ही साइकिलें प्राप्त होते ही वितरण का काम शुरू कर दिया जाएगा। देरी की मुख्य वजह टेंडर प्रक्रिया का पेंच इस देरी का सबसे बड़ा कारण शिक्षा विभाग की सुस्त टेंडर प्रक्रिया को माना जा रहा है। नियमानुसार, सत्र की शुरुआत के कुछ महीनों के भीतर ही छात्राओं को साइकिलें मिल जानी चाहिए ताकि दूर-दराज से स्कूल आने-जाने में उन्हें सुविधा हो सके। लेकिन इस बार माध्यमिक शिक्षा निदेशालय स्तर पर टेंडर प्रक्रिया में हुई देरी ने पूरे जिले का गणित बिगाड़ दिया है। जिले की मेगा पीटीएम में 21 छात्राओं को साइकिल दी गई है। कहां कितनी छात्राओं को है इंतजार जिले में साइकिल वितरण की सूची में उदयपुरवाटी ब्लॉक सबसे ऊपर है, जहां की 931 बेटियों को साइकिल का इंतजार है। वहीं, सिंघाना में यह संख्या सबसे कम 192 है। ब्लॉक लाभार्थी छात्राएं उदयपुरवाटी 931 नवलगढ़ 903 खेतड़ी 789 अलसीसर 497 झुंझुनूं 445 पिलानी 408 चिड़ावा 381 मंडावा 345 सूरजगढ़ 353 बुहाना 271 सिंघाना 192 नोडल केंद्रों पर जुड़ेंगे पार्ट्स इस बार भी छात्राओं को दी जाने वाली साइकिलों का रंग भगवा ही रहेगा। आपूर्ति करने वाली ठेका कंपनी साइकिलों को सीधे तैयार स्थिति में नहीं भेजेगी। इसके बजाय साइकिल के अलग-अलग पार्ट्स ब्लॉक मुख्यालयों की नोडल स्कूलों में भेजे जाएंगे। वहां मैकेनिक इन पार्ट्स को जोड़कर साइकिलें तैयार करेंगे, जिसके बाद स्कूलों को आवंटन किया जाएगा। पुराने स्टॉक का भी नहीं हुआ सही इस्तेमाल विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में पिछले सत्र (2024-25) की 390 साइकिलें पहले से ही बची हुई (अधिशेष) हैं। नवलगढ़ में सर्वाधिक 173 साइकिलें स्टॉक में हैं। यदि विभाग इन बची हुई साइकिलों के वितरण और नई डिमांड के बीच बेहतर तालमेल बिठाता, तो कई छात्राओं को राहत मिल सकती थी। ट्रांसपोर्ट वाउचर की पहुंच भी कम जिले में 9वीं कक्षा में प्रवेश लेने वाली 5710 छात्राओं में से केवल 195 छात्राओं को ही ट्रांसपोर्ट वाउचर योजना का लाभ मिल पा रहा है। यानी बाकी छात्राओं के लिए स्कूल आने-जाने का सबसे बड़ा सहारा ये सरकारी साइकिलें ही हैं। साइकिल न मिलने से कई छात्राओं को रोजाना कई किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचना पड़ रहा है।


