भाजपा के नागौर जिलाध्यक्ष रामधन पोटलिया ने मनरेगा का नाम बदलकर ‘वी बी जी राम जी’ करने के विरोध पर कांग्रेस पर निशाना साधा है। पोटलिया ने कहा कि कांग्रेस पार्टी को देश में केवल गांधी परिवार ही नजर आता है, यही कारण है कि देश की करीब 600 बड़ी योजनाएं और संस्थान सिर्फ एक ही परिवार के नाम पर रखे गए हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि जब सरकार किसी योजना का नाम भगवान राम के नाम पर रखती है, तो कांग्रेस के पेट में दर्द होने लगता है। जिलाध्यक्ष ने इसे कांग्रेस की रामविरोधी मानसिकता का परिचायक बताते हुए कहा कि विपक्ष इसी संकुचित सोच के कारण जनहितकारी बदलावों का विरोध कर रहा है। भ्रष्टाचार पर लगाम से बौखलाई कांग्रेस पोटलिया ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह पार्टी हमेशा भ्रष्टाचार की संभावनाओं में जीती आई है। उन्होंने दावा किया कि पूर्ववर्ती सिस्टम के माध्यम से जो अवैध कमाई और भ्रष्टाचार होता था, वर्तमान सरकार ने उस पर सीधी चोट की है। इसी व्यवस्था परिवर्तन और लूट के रास्ते बंद होने के कारण कांग्रेस नेता अब अनर्गल बयानबाजी पर उतर आए हैं। उन्होंने साफ किया कि विपक्ष की यह बौखलाहट जनहित के बजाय अपने निजी स्वार्थों को लेकर है। रोजगार के दिनों में बढ़ोतरी और किसानों को राहत योजना के तकनीकी पक्ष और सुधारों की जानकारी देते हुए जिलाध्यक्ष ने बताया कि कांग्रेस के शासनकाल में जहां केवल 100 दिन का रोजगार दिया जाता था, वहीं वर्तमान सरकार ने इसे बढ़ाकर 125 दिन कर दिया है। इसके साथ ही सरकार ने किसानों की व्यावहारिक समस्याओं का भी ध्यान रखा है। अक्सर खेती के सीजन में मजदूरों की कमी की शिकायत रहती थी, जिसे दूर करने के लिए अब योजना में दो महीने की छुट्टी का विशेष प्रावधान किया गया है। इससे खेती के समय किसानों को पर्याप्त श्रमिक उपलब्ध हो सकेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। मिट्टी डालने के बजाय अब बनेगा स्थायी इन्फ्रास्ट्रक्चर पोटलिया ने मनरेगा के पुराने स्वरूप की आलोचना करते हुए कहा कि कांग्रेस के समय इस योजना के तहत केवल मिट्टी को एक जगह से उठाकर दूसरी जगह डालने का काम होता था, जिसमें भारी धांधली थी। अब सरकार की मंशा मनरेगा के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस बुनियादी सुविधाएं विकसित करने की है। इसके तहत अब गांवों में सड़कों और अन्य स्थायी इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया जा रहा है ताकि ग्रामीणों की आय बढ़ सके। सरकार का लक्ष्य है कि गांवों में बेहतर सड़कों का निर्माण हो जिससे ग्रामीण आबादी की बाजार तक पहुंच सुगम हो और उनका आर्थिक स्तर ऊंचा उठ सके।


