भास्कर न्यूज | बलौदाबाजार जिले में भाटापारा के बकुलाही प्लांट में हाल ही में हुए हादसे ने जिले के लंबे औद्योगिक खौफ को फिर उजागर कर दिया। यह कोई अकेला मामला नहीं है, बल्कि पिछले 13 सालों से जारी खौफनाक ट्रैक रिकॉर्ड की अगली कड़ी है। जिले के प्रमुख सीमेंट और इस्पात संयंत्रों में वर्ष 2013 से अब तक दर्ज हादसों में कम से कम 31 मजदूरों की मौके पर ही मौत हो चुकी है। अधिकांश हादसों का वजह एक ही रही, प्लांट में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। घायलों की आधिकारिक संख्या उपलब्ध नहीं है। कई गंभीर रूप से घायल या झुलसे मजदूर इलाज के दौरान दम तोड़ चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक मौत का आंकड़ा इससे भी अधिक होने की संभावना है। औसतन हर साल तीन मजदूर इन मोटे इस्पात और सीमेंट संयंत्रों में सुरक्षा की कमी के कारण मारे जाते हैं। हादसे के कारण भिन्न-भिन्न हैं—किल्न से गिरना, गैस रिसाव, सिलेंडर ब्लास्ट, या भारी मशीनों की चपेट में आना। यह केवल औद्योगिक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था की संगठित विफलता है। भयंकर ट्रैक रिकॉर्ड की शुरुआत 1 फरवरी 2013 को अंबुजा सीमेंट संयंत्र से हुई थी। उस हादसे में छह स्थानीय मजदूरों की मौत हो गई थी। तब जिले में भारी विरोध प्रदर्शन हुए, कई दिन बाजार बंद रहे और प्रशासन को धारा 144 लगानी पड़ी। लेकिन इसके बाद सुरक्षा सुधार की बजाय संयंत्र प्रबंधन ने स्थानीय मजदूरों की जगह बाहरी राज्यों से श्रमिक लाने की नीति अपनाई। नतीजा यह हुआ कि स्थानीय युवा रोजगार से वंचित रह गए और संयंत्रों में काम करने वाले श्रमिकों की आवाज़ दब गई। 2017 में अंबुजा संयंत्र में दो मौतें हुईं। 2021 में श्री सीमेंट प्लांट में दो मजदूर मरे। 2023 में अल्ट्राटेक संयंत्र में ब्लास्ट और किल्न हादसों में कई मजदूर झुलसे और कुछ की मौत हुई। 2024 में अंबुजा माइंस में सिलेंडर ब्लास्ट में छह मजदूर गंभीर रूप से घायल हुए। 2025 में श्री सीमेंट प्लांट में एक टन वजनी क्वायल गिरने से मजदूर की मौत हुई। हर घटना के बाद सिर्फ जांच, मुआवजा और फिर चुप्पी रही। ताजा हादसे के बाद कलेक्टर दीपक सोनी ने कड़े कदम उठाने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि जिले के सभी औद्योगिक संयंत्रों में सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा होगी। प्रत्येक इकाई का विशेष सुरक्षा ऑडिट कराया जाएगा। लापरवाही पाए जाने पर कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।


