भास्कर न्यूज | हजारीबाग हजारीबाग जिले के 16 प्रखंड के 22 लाख आबादी को एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरकार द्वारा मुहैया कराए गए 28 एंबुलेंस में पांच एंबुलेंस एक साल से गैराज में पड़े हुए हैं। इनमें तीन एंबुलेंस हजारीबाग बड़कागांव रोड में फतहा जंगल में संचालित कथित एक गैराज में पड़े हैं। वही दो एंबुलेंस को रांची गैराज में छोड़ दिया गया है। जबकि पांच एंबुलेंस ठीक होकर उस जंगल के गैराज से 10 माह बाद रिपेयरिंग होकर बाहर निकले हैं। वही 28 एंबुलेंस में 14 एंबुलेंस ऐसे हैं जिसमें लगे जीवन रक्षक उपकरण खराब हो चुके हैं या फिर उनकी स्थिति लचर हो गई है। ऐसे एंबुलेंस सिर्फ ऑक्सीजन बीपी मशीन के साथ मरीज को अस्पताल तक पहुंचाने का काम करते आ रहे हैं। विभागीय लापरवाही इस हद तक है कि एंबुलेंस खराब होने के बाद एक साल में भी उन्हें दुरुस्त नहीं कराया जा पा रहा है। स्थिति यह है कि जंगल के गैराज में खड़े-खड़े दो एंबुलेंस के ऊपर पेड़ गिर जाने के कारण वह रिपेयरिंग के काबिल भी नहीं रहा है। महज 8 से 10 साल इन दोनों एंबुलेंस का उपयोग हुआ और अब वह कबाड़ में तब्दील हो गया है। गैरेज में पड़े तीन एंबुलेंस में मात्र एक एंबुलेंस की ही रिकवरी संभव है। मैनेजर ने एंबुलेंस का पार्ट्स नहीं मिलने की बात कही एजेंसी के मैनेजर ने बताया कि हजारीबाग जिले को 28 एम्बुलेंस मिले हैं। जिसमें ऑक्सीजन नेबुलाइजर बीपी वेंटीलेटर इत्यादि लगे हुए हैं। इनमें 50 फ़ीसदी एंबुलेंस वैसे हैं जिनमें किसी में वेंटिलेटर खराब हो गया है तो किसी में नेबुलाइजर सिस्टम खराब है। लंबे समय तक गैराज में पड़े रहने का कारण एंबुलेंस का पार्ट्स नहीं मिलने की बात कही गई। सबसे बड़ी बात यह है कि हजारीबाग शहर व आसपास में दर्जनों गैराज होने के बावजूद 108 एंबुलेंस के खराब होने पर उन्हें हजारीबाग बड़कागांव रोड में संचालित घने जंगल के बीच एक गैराज में छोड़ा गया है। इस गैराज में 1 साल तक एक ही जगह पर खड़े-खड़े सभी एंबुलेंस की स्थिति जर्जर हो गई है। जो बनकर बाहर भी निकले हैं उनकी भी स्थिति ठीक नहीं है।


